रायपुर। जांजगीर जिले से जुड़े एक चर्चित मामले में Supreme Court of India ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कथित अनाचार के आरोपी पिता को डीएनए टेस्ट कराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में डीएनए जांच को केवल “निजता का हनन” मानकर टाला नहीं जा सकता, खासकर जब मामला पीड़िता और उसके पुत्र के अधिकारों से जुड़ा हो।
मामले में पीड़िता के पुत्र की ओर से पितृत्व संबंधी सत्यता स्थापित करने के लिए डीएनए टेस्ट की मांग की गई थी। इस पर 21 सितंबर 2021 को बसना कोर्ट ने कथित आरोपी को डीएनए जांच कराने का आदेश दिया था।
हालांकि आरोपी पिता ने इस आदेश को चुनौती देते हुए High Court of Chhattisgarh में याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट ने 16 जनवरी 2025 को आरोपी को राहत देते हुए पर्याप्त सबूतों के अभाव का हवाला देकर डीएनए टेस्ट संबंधी आदेश को खारिज कर दिया था।
इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां पीड़िता के पुत्र की ओर से हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में सत्य सामने लाने के लिए डीएनए टेस्ट एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक माध्यम है और इसे केवल निजता के अधिकार के आधार पर रोका नहीं जा सकता।
शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के फैसले को पलटते हुए कथित आरोपी पिता को डीएनए टेस्ट कराने के निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को रेप पीड़िताओं और उनके बच्चों के अधिकारों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
