रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सहकारिता एवं निजी क्षेत्र में उर्वरक वितरण का मुद्दा जोरदार ढंग से उठा। कांग्रेस विधायक दलेश्वर साहू ने सरकार पर लक्ष्य के विपरीत उर्वरकों के वितरण का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की जांच कराने की मांग की। वहीं आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जांच कराने का कोई औचित्य नहीं है।
प्रश्नकाल में दलेश्वर साहू ने कहा कि सरकार के जवाब में उर्वरक वितरण के आंकड़ों में विरोधाभास है। उन्होंने सवाल उठाया कि सहकारिता और निजी क्षेत्र में आवंटन के प्रतिशत अलग-अलग बताए जा रहे हैं। उनका आरोप था कि कई स्थानों पर जरूरत से कहीं अधिक उर्वरक भेजा गया है, जबकि अन्य क्षेत्रों में किसानों को पर्याप्त खाद नहीं मिल रही। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार इस मामले की जांच समिति गठित करेगी।
मंत्री रामविचार नेताम ने जवाब में कहा कि विधायक द्वारा प्रस्तुत आंकड़े तथ्यात्मक नहीं हैं। उन्होंने बताया कि कुल भंडारण का 64 प्रतिशत सहकारी क्षेत्र और 36 प्रतिशत निजी क्षेत्र में है। भारत सरकार उर्वरक कंपनियों को आवंटन करती है, जबकि राज्य सरकार केवल यह तय करती है कि किस क्षेत्र में पहले आपूर्ति की जाए। उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर पहले खाद उपलब्ध कराया जाता है, क्योंकि वहां समय पर आपूर्ति करना चुनौतीपूर्ण होता है।
मंत्री ने बताया कि केंद्र से प्राप्त उर्वरकों की कंपनीवार, मौसमवार और जिलावार जानकारी विधानसभा पुस्तकालय में उपलब्ध है। विभाग केवल उपलब्ध और शेष उर्वरकों का रिकॉर्ड रखता है। लक्ष्य से अधिक वितरण की जांच की मांग पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि “जांच कराने का कोई औचित्य नहीं है।”
