1.55 लाख नाम सूची से हटाने, ई-केवाईसी और नए पंजीयन पर गरमाया सदन, मंत्री बोलीं- केवल ई-केवाईसी से किसी को अपात्र नहीं किया गया
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के प्रश्नकाल में गुरुवार को महतारी वंदन योजना को लेकर जोरदार हंगामा हुआ। कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने योजना से 1 लाख 55 हजार 655 महिलाओं के नाम हटाने, ई-केवाईसी के कारण रुकी किस्तों और नए हितग्राहियों के लिए पोर्टल बंद होने का मुद्दा उठाया। जवाब में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि किसी भी महिला को सिर्फ ई-केवाईसी नहीं होने के कारण अपात्र नहीं किया गया है। हालांकि करीब एक लाख महिलाओं की किस्त ई-केवाईसी लंबित होने के कारण रुकी हुई है।
सदन में मंत्री ने बताया कि योजना के लिए 70 लाख 27 हजार 154 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें 70 लाख 9 हजार 658 महिलाओं को पहली किस्त जारी की गई थी। जून 2026 तक 68 लाख 54 हजार 3 पात्र महिलाओं को नियमित लाभ मिल रहा है। मार्च 2024 के बाद 1 लाख 55 हजार 655 महिलाओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। इनमें मृत्यु, आयकरदाता, शासकीय सेवकों के परिजन तथा अन्य निर्धारित मापदंडों के तहत अपात्र पाए गए हितग्राही शामिल हैं।
उमेश पटेल ने सरकार के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि मई तक केवल 17 हजार लोगों का ई-केवाईसी लंबित था तो करीब एक लाख महिलाओं की रुकी हुई किस्त का आंकड़ा कैसे सामने आया। उन्होंने कहा कि हटाए गए हितग्राहियों और ई-केवाईसी लंबित मामलों के आंकड़े एक-दूसरे से मेल नहीं खाते। इस पर मंत्री ने कहा कि यह राज्यभर का आंकड़ा है और कई हितग्राहियों की मृत्यु भी हो चुकी है। दो या दो से अधिक आवेदन मिलने के मामलों में भी हितग्राहियों को अपात्र घोषित किया गया है।
कांग्रेस विधायक ने यह भी पूछा कि महतारी वंदन योजना का पोर्टल दोबारा कब खोला जाएगा, ताकि नवविवाहित और नई पात्र महिलाओं का नाम जोड़ा जा सके। इस पर मंत्री ने कहा कि “विष्णुदेव साय की सरकार है, किसी पात्र महिला के साथ अन्याय नहीं होगा। उचित समय पर पोर्टल खोलने का निर्णय लिया जाएगा।”
मंत्री के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने सदन में नारेबाजी की और वॉकआउट कर दिया। प्रश्नकाल के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
