इंडोनेशिया के इन द्वीपों से जुड़ी है लौंग की कहानी, मसाले के कारोबार ने सुल्तानों को बनाया था बेहद अमीर
नई दिल्ली। लौंग भारतीय रसोई का जाना-पहचाना मसाला है। चाय से लेकर सब्जियों और कई पारंपरिक व्यंजनों तक इसका इस्तेमाल स्वाद और खुशबू बढ़ाने के लिए किया जाता है। इसे पारंपरिक रूप से औषधीय गुणों के लिए भी जाना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि लौंग की कहानी आज से नहीं, बल्कि हजारों साल पुरानी है और इसका मूल क्षेत्र इंडोनेशिया के कुछ छोटे-छोटे द्वीप माने जाते हैं?
इतिहास से जुड़े विवरणों के मुताबिक, लौंग का प्राकृतिक विस्तार इंडोनेशिया के मालुकु द्वीपसमूह से जुड़ा रहा है। खास तौर पर टर्नेट, टिडोर और आसपास के द्वीप लौंग के पेड़ों के लिए प्रसिद्ध रहे हैं। करीब तीन हजार साल पहले भी इन द्वीपों में लौंग के इस्तेमाल और व्यापार के संकेत मिलते हैं।
टर्नेट और टिडोर बने मसाला व्यापार के केंद्र
मालुकु द्वीपसमूह को कभी-कभी ‘स्पाइस आइलैंड्स’ यानी मसाला द्वीपों के नाम से भी जाना जाता है। यहां लौंग की प्रचुरता ने स्थानीय शासकों को व्यापार के जरिए बड़ी संपत्ति हासिल करने का मौका दिया। टर्नेट और टिडोर के सुल्तानों का प्रभाव भी लौंग के व्यापार से काफी बढ़ा।
लौंग की मांग बढ़ने के साथ यूरोपीय व्यापारियों की नजर भी इन द्वीपों पर पड़ी। बाद में पुर्तगाली, डच और अंग्रेज व्यापारी इस क्षेत्र में पहुंचे और मसालों के व्यापार पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश की। लंबे समय तक इन द्वीपों का इतिहास यूरोपीय औपनिवेशिक प्रतिस्पर्धा से जुड़ा रहा।
ज्वालामुखीय द्वीपों की अनोखी दुनिया
टर्नेट एक ज्वालामुखीय द्वीप है और यहां आज भी ज्वालामुखीय भूगोल साफ दिखाई देता है। इसके बावजूद यह क्षेत्र जैव विविधता के लिए भी जाना जाता है। यहां कई अनोखी वनस्पतियों और जीव-जंतुओं की प्रजातियां पाई जाती हैं।
इसी क्षेत्र में ब्रिटिश प्रकृतिविद अल्फ्रेड रसेल वॉलेस ने भी लंबे समय तक अध्ययन किया था। 19वीं सदी में उन्होंने मलय द्वीपसमूह के विभिन्न हिस्सों की यात्रा कर बड़ी संख्या में जीव-जंतुओं और अन्य जैविक नमूनों का संग्रह किया। उनके अध्ययन ने दुनिया को इस क्षेत्र की असाधारण जैव विविधता को समझने में महत्वपूर्ण मदद दी।
सिर्फ मसाला नहीं, इतिहास का हिस्सा है लौंग
आज लौंग दुनिया के कई देशों में उगाई जाती है और वैश्विक मसाला बाजार का हिस्सा है। लेकिन इसकी ऐतिहासिक जड़ें इंडोनेशिया के मालुकु द्वीपों से गहराई से जुड़ी हैं। कभी जिस लौंग को पाने के लिए समुद्र पार से व्यापारी इन छोटे-छोटे द्वीपों तक पहुंचते थे, वही मसाला आज दुनिया भर की रसोइयों में आसानी से मिल जाता है।
यही वजह है कि लौंग को केवल एक मसाला कहना इसके हजारों साल पुराने इतिहास को छोटा कर देना होगा।
