जातिगत जनगणना के मौजूदा प्रारूप में खामियां, कांग्रेस ने उठाए सवाल
रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से आयोजित पत्रकार वार्ता में महाराष्ट्र कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ नेता नाना भाऊ पटोले ने जातिगत जनगणना के मौजूदा प्रारूप को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत की मौजूदगी में पटोले ने आरोप लगाया कि मौजूदा प्रश्नावली में ऐसी खामियां हैं, जिनसे जातियों की वास्तविक संख्या का सही आकलन मुश्किल हो जाएगा।
पटोले ने विशेष रूप से प्रश्नावली के सवाल नंबर 10 में ओपन-एंडेड विकल्प रखे जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इसके बजाय प्रमाणित जातियों की ड्रॉपडाउन सूची होनी चाहिए। भारत में एक ही जाति अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में अलग नाम, उपजाति, बोली और वर्तनी से पहचानी जाती है। ऐसे में गणनाकर्मियों द्वारा अलग-अलग नाम दर्ज किए जाने से एक ही जाति कई हिस्सों में बंट सकती है और आंकड़ों में बड़ी विसंगति पैदा हो सकती है।
कांग्रेस ने मौजूदा प्रश्नावली को रद्द कर तेलंगाना और बिहार में अपनाई गई पद्धति के आधार पर नई प्रश्नावली तैयार करने की मांग की। पार्टी का कहना है कि नई प्रश्नावली तैयार करने से पहले राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और आम लोगों से व्यापक विचार-विमर्श किया जाना चाहिए।
पटोले ने कहा कि मौजूदा प्रारूप में ओबीसी या पिछड़ा वर्ग का स्पष्ट उल्लेख तक नहीं है, जिससे अन्य पिछड़ा वर्ग और अति पिछड़े वर्ग की वास्तविक आबादी का प्रमाणिक आंकड़ा सामने आने पर सवाल खड़ा होता है। उन्होंने कहा कि गलत आंकड़ों का असर आरक्षण, शिक्षा, छात्रवृत्ति, सरकारी रोजगार और कल्याणकारी योजनाओं में हिस्सेदारी पर पड़ सकता है।
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि केंद्र और राज्य सरकारों के पास पहले से ही हजारों जातियों की सूचियां उपलब्ध हैं। इसके बावजूद राष्ट्रीय स्तर की जातिगत जनगणना में प्रमाणित सूची को शामिल नहीं किया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि जब सूची मौजूद है तो ड्रॉपडाउन व्यवस्था लागू क्यों नहीं की गई और इसके पीछे किसका निर्णय है।
पटोले ने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से पारदर्शी जातिगत जनगणना की मांग करती रही है। पार्टी ने केंद्र सरकार से मौजूदा प्रारूप में आवश्यक सुधार कर सही गिनती, सही आंकड़े और सही हिस्सेदारी सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि पिछड़ों, दलितों और वंचित वर्गों के अधिकारों की लड़ाई से कांग्रेस पीछे नहीं हटेगी।
