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गणेश चतुर्थी 2026: उत्सव के दौरान बप्पा को अर्पित करें ये 10 भोग, जानिए किस दिन क्या चढ़ाएं

नई दिल्ली। गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश की आराधना और भक्ति का विशेष अवसर माना जाता है। गणेशोत्सव के दौरान श्रद्धालु बप्पा को उनकी प्रिय वस्तुओं का भोग लगाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान गणेश को भोग अर्पित करने से सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की जाती है।

आमतौर पर गणेशोत्सव 10 दिनों तक चलता है, लेकिन 2026 में यह उत्सव 14 सितंबर से 25 सितंबर तक 12 दिनों का रहेगा। ऐसे में पहले 10 दिनों के लिए अलग-अलग पारंपरिक भोग अर्पित किए जा सकते हैं, जबकि 11वें और 12वें दिन भक्त अपनी श्रद्धानुसार भोग लगा सकते हैं।

पहले दिन—मोदक

गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश को मोदक का भोग लगाना विशेष माना जाता है। उकडीचे मोदक, चावल के आटे के मोदक या मावा मोदक अर्पित किए जा सकते हैं। गणपति पूजा में मोदक का विशेष महत्व है।

दूसरे दिन—मोतीचूर के लड्डू

दूसरे दिन बप्पा को मोतीचूर के लड्डू अर्पित करें। लड्डू भगवान गणेश के प्रिय भोगों में शामिल माने जाते हैं। मान्यता है कि मिठाई का भोग जीवन में सुख और प्रसन्नता का प्रतीक है।

तीसरे दिन—बेसन के लड्डू

तीसरे दिन बेसन के लड्डू का भोग लगाया जा सकता है। देसी घी से तैयार इन लड्डुओं को पारंपरिक रूप से गणपति को अर्पित किया जाता है।

चौथे दिन—मावा पेड़ा

चौथे दिन मावा पेड़ा का भोग लगाया जा सकता है। इसमें केसर और इलायची का इस्तेमाल कर इसे स्वादिष्ट बनाया जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं में भगवान गणेश को बुद्धि और ज्ञान का देवता माना जाता है।

पांचवें दिन—पूरण पोली

महाराष्ट्र का पारंपरिक व्यंजन पूरण पोली भी गणपति को अर्पित किया जाता है। चने की दाल और गुड़ से तैयार यह व्यंजन गणेशोत्सव के पारंपरिक भोगों में शामिल है।

छठे दिन—नारियल के लड्डू

छठे दिन नारियल के लड्डू का भोग लगाया जा सकता है। ताजे या सूखे नारियल से तैयार यह प्रसाद गणपति पूजा में अर्पित किया जाता है।

सातवें दिन—शीरा या हलवा

सातवें दिन सूजी का शीरा या हलवा बनाकर बप्पा को भोग लगाएं। सूजी, घी और मेवों से तैयार शीरा कई घरों में पूजा के प्रसाद के रूप में बनाया जाता है।

आठवें दिन—खीर

आठवें दिन चावल या मखाने की खीर का भोग लगाया जा सकता है। दूध, चावल या मखाने और मेवों से तैयार खीर को श्रद्धापूर्वक भगवान गणेश को अर्पित किया जाता है।

नौवें दिन—मालपुआ

नौवें दिन मालपुआ का भोग लगाया जा सकता है। इसे चाशनी के साथ भगवान गणेश को अर्पित किया जाता है। कई स्थानों पर गणेश पूजा में अलग-अलग तरह की मिठाइयां भी प्रसाद के रूप में चढ़ाई जाती हैं।

दसवें दिन—मोदक, पंचामृत या विविध भोग

अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन से पहले बप्पा को मोदक, पंचामृत और विभिन्न मिठाइयों का भोग लगाया जा सकता है। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार अन्य पकवान भी अर्पित करते हैं।

11वें और 12वें दिन क्या चढ़ाएं?

चूंकि 2026 में गणेशोत्सव 12 दिनों का रहेगा, 11वें और 12वें दिन भक्त अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार कोई भी सात्विक भोग अर्पित कर सकते हैं।

भोग लगाते समय रखें इन बातों का ध्यान

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करना शुभ माना जाता है। पूजा और भोग में स्वच्छता तथा सात्विकता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। वहीं, गणेश पूजा में तुलसी दल अर्पित न करने की परंपरा भी प्रचलित है।

ध्यान दें: अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में गणपति पूजा तथा भोग की परंपराएं अलग हो सकती हैं। ऊपर बताए गए भोग धार्मिक लोक-मान्यताओं और प्रचलित परंपराओं पर आधारित हैं।

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