राज्योत्सव के मंच से संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल का संदेश, पंडवानी-पंथी-ददरिया के संरक्षण के साथ चित्रकोट, सिरपुर, राजिम और मैनपाट के विकास पर जोर
रायपुर। छत्तीसगढ़ की पहचान सिर्फ खनिज संपदा और प्राकृतिक संसाधनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की लोकसंस्कृति, जनजातीय परंपराएं और ऐतिहासिक धरोहर भी प्रदेश की असली ताकत हैं। राज्योत्सव 2026 के मंच से संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने इसी सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देने और पर्यटन की संभावनाओं को विस्तार देने का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि पंडवानी, पंथी और ददरिया जैसी लोककलाएं छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान हैं। इन परंपराओं को सहेजना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना बेहद जरूरी है। लोक कलाकारों को प्रोत्साहन, पारंपरिक कलाओं का संरक्षण और सांस्कृतिक आयोजनों को बढ़ावा देकर प्रदेश की समृद्ध विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई जा सकती है।
चित्रकोट से मैनपाट तक पर्यटन की संभावनाएं
संस्कृति मंत्री ने प्रदेश के पर्यटन स्थलों की संभावनाओं पर भी जोर दिया। चित्रकोट जलप्रपात की प्राकृतिक खूबसूरती, सिरपुर की ऐतिहासिक विरासत, राजिम की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान और मैनपाट की मनोरम वादियां छत्तीसगढ़ को पर्यटन के क्षेत्र में अलग पहचान दिलाने की क्षमता रखती हैं।
उन्होंने कहा कि पर्यटन का विकास केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे स्थानीय युवाओं, महिलाओं, हस्तशिल्पकारों और छोटे कारोबारियों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए रास्ते भी खुल सकते हैं।
सांस्कृतिक विरासत और विकास का साझा मंच बना राज्योत्सव
राज्योत्सव 2026 के शुभारंभ समारोह में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा सहित प्रदेश के मंत्री, सांसद, विधायक, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।
कार्यक्रम में विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों को बचाए रखने का संदेश भी सामने आया। छत्तीसगढ़ की लोककलाओं, जनजातीय परंपराओं और पर्यटन स्थलों को नई पहचान दिलाने की दिशा में राज्योत्सव का मंच महत्वपूर्ण अवसर बना।
