73 लाख से अधिक श्रमिकों की ई-केवाईसी पूरी, अकुशल श्रमिकों के सत्यापन में बड़े राज्यों में भी छत्तीसगढ़ अव्वल
रायपुर, 3 नवंबर। श्रमिकों के डिजिटल सत्यापन के मामले में छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वीबी-जी राम जी योजना के तहत कुशल एवं अर्द्धकुशल श्रमिकों की ई-केवाईसी में छत्तीसगढ़ ने सभी राज्यों को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया है। वहीं अकुशल श्रमिकों की ई-केवाईसी में 91.37 प्रतिशत उपलब्धि के साथ प्रदेश बड़े राज्यों में प्रथम और देशभर में चौथे स्थान पर है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत तथा ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में प्रदेश ने यह उपलब्धि दर्ज की है। केंद्र सरकार की 3 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों श्रेणियों को मिलाकर छत्तीसगढ़ में अब तक 73 लाख 3 हजार 451 श्रमिकों की ई-केवाईसी पूरी हो चुकी है। यह कुल पंजीकृत श्रमिकों का 91.28 प्रतिशत है।
अकुशल श्रमिकों की ई-केवाईसी में बड़े राज्यों में पहला स्थान
योजना के तहत प्रदेश में कुल 79 लाख 23 हजार 503 पंजीकृत अकुशल श्रमिक हैं। इनमें से 72 लाख 39 हजार 364 श्रमिकों की ई-केवाईसी पूरी हो चुकी है। प्रदेश ने 91.37 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की है। राष्ट्रीय औसत 61.01 प्रतिशत के मुकाबले छत्तीसगढ़ का प्रदर्शन 30.36 प्रतिशत अंक अधिक है। इस श्रेणी में लद्दाख, मिजोरम और त्रिपुरा के बाद छत्तीसगढ़ चौथे स्थान पर है, जबकि बड़े राज्यों में प्रदेश पहले स्थान पर है।
कुशल-अर्द्धकुशल श्रमिकों के सत्यापन में देश में अव्वल
कुशल एवं अर्द्धकुशल श्रमिकों की ई-केवाईसी में भी छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। प्रदेश के 77 हजार 891 पंजीकृत श्रमिकों में से 64 हजार 87 की ई-केवाईसी पूरी हो चुकी है। इस तरह 82.28 प्रतिशत उपलब्धि के साथ छत्तीसगढ़ सभी राज्यों में प्रथम स्थान पर है। इस श्रेणी में राष्ट्रीय औसत महज 13.53 प्रतिशत है।
ई-केवाईसी की यह उपलब्धि श्रमिकों की पहचान के सत्यापन, सरकारी अभिलेखों की शुद्धता और रोजगार एवं मजदूरी भुगतान की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे पात्र श्रमिकों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।
राज्य सरकार का कहना है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और श्रमिकों के हितों की सुरक्षा के लिए डिजिटल व्यवस्थाओं को लगातार प्रभावी बनाया जा रहा है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा ई-केवाईसी कार्य की नियमित निगरानी की जा रही है।
