दिल्ली / दिल्ली सरकार को संसदीय सचिव बिल पर बड़ा झटका लगा है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दिल्ली सरकार के विधेयक को वापस लौटा दिया है।
ऐसे में सरकार के 21 संसदीय सचिवों की विधानसभा सदस्यता जाने का ख़तरा पैदा हो गया है। दरअसल केजरीवाल ने 2015 में दोबारा सरकार गठन के बाद मार्च में अपने 21 विधायकों को संसदीय सचिव का पद दिया था, लेकिन वह लाभ के पद की श्रेणी में आ गया, जिस पर विपक्ष ने काफ़ी सवाल उठाए। मामले में अब चुनाव आयोग को फैसला लेना है।
भाजपा ने आम आदमी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री द्वारा संवैधानिक शक्तियों पर हमला करना कहीं से भी उचित नहीं है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि 21 विधायकों से जुड़े विधेयक को राष्ट्रपति द्वारा नामंजूर करने से ये साफ हो गया है कि केजरीवाल ने इस मामले पर सही निर्णय नहीं लिया था।
राष्ट्रपति द्वारा विधेयक को नामंजूर करने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस ने कहा कि इससे साफ जाहिर होता है कि यह आम आदमी पार्टी नहीं बल्कि वीआईपी पार्टी है।
इसके अलावा संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप ने कहा है कि ये स्पष्ट है कि आम आदमी पार्टी के 21 विधायक लाभ के पद पर थे, ऐसे में संविधान के हिसाब से उनकी सदस्यता रद्द की जा सकती है। उन्होंने साथ ही कहा कि नियमों के मुताबिक इन 21 सीटों पर फिर से चुनाव कराए जाने चाहिए।
