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कलेक्टर की गाड़ी में फर्जी किमी. दर्शाकर डीजल की हेराफरी, जिम्मेदार कौन………..

रिपोर्ट / द्रोणाचार्य दुबे / 08982418547
00 कलेेक्टर है उत्तराधिकारी – हम तो सिर्फ बिल बनाते है – विजय शंकर सिंह वित्त विभाग सहायक गेड – 02
00 सूचना का अधिकार से हुआ मामले का खुलासा

कोरिया / अंधेर नगरी चौपट राजा की कहानी को चरितार्थ करता कोरिया जिला मुख्यालय के कर्ताधरता के नाक के नीचे डीजल जैसे ईधन के नाम पर आम जनता के पैसों को धुएं में उड़ाने का क्रम लगातार जारी है। मामले का खुलासा आरटीआई द्वारा प्राप्त जानकारी के माध्यम से हुआ। न्युज पेज 13 को मिले दस्तावेज के अनुसार जब हमने मामले की झानबीन की तो जिला प्रशासन के जिला नाजीर और वित्त् विभाग में बैठे अधिकारी कर्मचारियों ने बारी – बारी मामले से कन्नी काटते हुए कहा कलेेक्टर है उत्तराधिकारी।
22दरअसल मामला किलोमीटर को बढ़ाकर विल के भुगतान करने का है । सूचना के अधिकार 2005 के तहत प्राप्त जानकारी में कलेक्टर महोदय के वाहन क्रमांक CG02 – 9000 का लाग बुक हाथ लगा जिसमें किलोमीटर का खेल खेला जाना प्रदर्षित पाया गया। न्युज पेज 13 को जो दस्तावेज हाथ लगे है उसमें साफ – साफ देखा जा सकता है कि कलेक्टर बगला से कलेक्टर कार्यालय और निम्न दूरिया जो दर्षायी गयी है वह विल्कुल भी सही नही है इसमें पुरे मामले में भारी भस्टाचार होने की बू आती दिख रही है। न्युज पेज 13 अपने खुलासे में यह साफ कर देना चाहता है कि जिन दस्तावेजो के आधार पर डीजल को धुएं में उड़ाकर पैसों का खेल खेला जा रहा है वह कलेक्टर कोरिया से संबंधित है और जो दूरिया 2014 – 15 में दर्षायी गयी है उस पर भी एक नजर दस्तावेजो के आधार पर आप डालेंगे तो ही पुरी फिल्म साफ़ हो पायेगी।

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कलेक्टर बंगला से कार्यालय 25 किमी0
कलेक्टर बंगला से तहसील 13 किमी0
कलेक्टर बंगला से गेस्ट हाउस 23 किमी0
कलेक्टर बंगला से हाईस्कूल 19 किमी0
कलेक्टर बंगला से अस्पताल 44 किमी0
कलेक्टर बंगला से मानस भवन 20 किमी0
कलेक्टर बंगला से स्ट्राग रूम 31 किमी0
जिसमें वापिस आने का कोई जिक्र नही है सिर्फ कार्य किमी0 की दूरिया ही दर्शा कर पैसे का भुगतान संबंधित पेट्रोल पम्प को कर दिया गया और जिनमे वापसी का जिक्र है वो निम्नानुसार है – —–
कलेक्टर बंगला से मनेन्द्रगढ़, लेदरी वापस 140 किमी0
कलेक्टर बंगला से कटगोड़ी वापस 50 किमी0
कलेक्टर बंगला से बरबसपुर वापस 55 किमी0
कलेक्टर बंगला से परेड मैदान वापस 45 किमी0 दर्शाया गया है।

ज्ञात रहे कि लाग बुक में दर्शाये गये किमी0 की दूरियों का सही आकलन और सर्वे किया जाय तो दर्शाये गये सभी किमी गलत पाये जायेगे। दर्शाये गये किमी0 की दूरिया लाग बुक में वाहन के चालन समय से पूर्व माईलोमीटर देखकर अंकित किया जाता है और दूसरी बार तब माईलोमीटर देखा जाता है जब बाहन को खड़ा किया जाता है, इन दोनों परिस्थितियों में किमी0 गलत हो ही नही सकता क्योकि माईलोमीटर से देखकर भरा जाने वाला लाग बुक में किमी0 की दूरियों अंतर स्पश्ट नही कर सकती है। उक्त रीडीग कलेक्टर कोरिया के उपयोग में हेाने वाली वाहन क्रमांक सीजी0 02/ 9000 का लाग बुक है। पुरे मामले की झानबीन के दौरान कलेक्टर कार्यालय के जिला नाजीर साफ़ – साफ़ पल्ला झाड़ते हुए कलेक्टर कोरिया और वित्त् विभाग में बैठे अधिकारी कर्मचारियों के ऊपर बात टाली जिसके बाद वित्त् विभाग ने भी मामले से कन्नी काटते हुए कहा कलेेक्टर है उत्तराधिकारी। इस दस्तावेज के आधार पर वित्त विभाग के सहायक गेड – 02 विजय शंकर सिंह से बात हुई तो अज्ञात कारण से नगर पालिक में मौजूद होने की बात को स्वीकार किया, मामाले के संबंध में जानकारी लेने का क्रम जारी रखा और इसी के मददेनजर शाम लगभग 05 बजे के आस पास सहायक ग्रेड – 02 विजय शंकर सिंह आफि!स पहुंचे जहां उन्होने मामले के संबंध में जानकारी देते हुएं पहले तो इधर – उधर की बात की बाद में बताया कि यह गलती कलेक्टर के अधिनस्त की मानी जा सकती है क्योकि डीजल लेने के लिएं पर्ची उन्ही के द्वारा जारी की जाती है और वाहन चालक डीजल पंप से लेता है हम तो सिर्फ पर्ची के आधार में खपत हुएं डीजल का बिल बनाते है जो कलेक्टर साहब के सामने अंतिम में पेश करने पर स्वीकृति के बाद पंप का भुगतान किया जाता है। पूरे मामले की देखरेख स्वयं कलेक्टर साहब ही करते है उत्तराधिकारी साहब है हम तो बिल बनाते है।

घटनाक्रम में प्रमुख तथ्य यह है कि अगर कलेक्टर साहब जिम्मेदार है तो उन्ही के नाक के नीचे धुएं में पैसे को उड़ाने का खेल हो रहा है और यदि कोई और जिम्मेदार है जो वाहन चालक द्वारा दिये जाने वाले लाग बुक की चेकिंग क्यों नही की जाती है या फिर इसे मामूली समझकर छोड़ दिया जाता है पर यह कहना बिलकुल भी गलत नही है कि जब कलेक्टर साहब की गाड़ी में ही झोल झाल है तो पूरे जिले के बारे में आम राय क्या हो सकती है यह सभी समझते है खैर अब भी कुछ नही बिगड़ा है चाहे तो साहब अव्यवस्थाओ को दुरुस्त कर सकते है।

लोगो को कहते सुना था कि कलेक्टर कार्यालय में लगी वाहनों के डीजल बिल में भारी गड़बड़ी है इसी उत्सुकता को जानने के लिए एक ईमानदार नागरिक होने के नाते सूचना के अधिकार का उपयोग किया और उससे जो जानकारी मिली वह दस्तावेजो के माध्यम से सामने है। मुझे तो यकीन नहीं हो रहा है कि यैसा भी हो रहा है।
विजेन्द्र यादव – जिल्दा –

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