Advertisement Carousel

राज्य की बाल नीति के प्रारूप पर हुई परिचर्चा : छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा आयोजित एक दिवसीय परिचर्चा सम्पन्न

रायपुर / छत्तीसगढ़ बाल संरक्षण आयोग द्वारा राज्य की बाल नीति के प्रारूप पर परिचर्चा के लिए आज यहां नवीन विश्राम गृह में कार्यशाला का आयोजन किया गया। छत्तीसगढ़ बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती शताब्दी पाण्डेय की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यशाला में कई महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त हुए।

कार्यशाला में बाल नशा के खिलाफ नीति बनाए जाने और शिक्षकों को बाल अधिकार की जानकारी दिए जाने के संबंध में विचार-विमर्श किया गया। गोद लेने की प्रक्रिया की जानकारी लोगों तक पहुंचाने और नक्सलवाद के दुष्परिणामों को पाठ्यक्रम में शामिल कर बच्चों को जागरूक करने पर भी चर्चा की गई। कामकाजी महिलाओं के बच्चों की देखरेख एवं प्री-प्राईमरी एजुकेशन के लिए संचालित क्रेज एवं प्ले स्कूल के संबंध में नियम बनाए जाने के संबंध में भी सुझाव प्राप्त हुए।
कार्यशाला में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य यशवंत जैन ने महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं को बालिका छात्रावास से जोड़ने का सुझाव दिया। स्व-सहायता समूह की महिलाएं छात्रावास की बालिकाओं के सम्पर्क में रहेंगी, तो बालिकाएं अपनी परेशानी उन्हें बता पाएंगी तथा छात्रावास में अप्रिय घटनाएं भी नहीं होगी। इसके अलावा कार्यशाला में एच.आई.वी. पीड़ित, सिकल सेल पीड़ित बच्चों के अधिकार के बारे में चर्चा की गई।

कार्यशाला में छत्तीसगढ़ राज्य बाल संरक्षण आयोग की सचिव श्रीमती सुषमा जैन, सदस्य शरद श्रीवास्तव एवं चाईल्ड राईट्स एण्ड यू संस्था के प्रतिनिधि कुमार निलेन्दु तथा आयोग के अन्य सदस्य गण उपस्थित थे।

error: Content is protected !!