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खाते में रुपयों को लेकर घिरीं मायावती

दिल्ली / सूत्रों के अनुसार आयकर विभाग ने जांच शुरू कर दी है। इसके तहत इनकम टैक्स विभाग ने कुछ बिल्डरों को नोटिस भेजा है। आरोप है कि जिन बिल्डरों को नोटिस भेजा है उनकी जमीन में मायावती के भाई आनंद कुमार का बेनामी हिस्सा है।

विमुद्रीकरण के बाद से प्रवर्तन निदेशालय पूरे देश की 10 बैंकों की 50 शाखाओं पर नजर रहे हुए है। इसी के तहत दिल्ली की करोलबाग स्थित यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की शाखा पर प्रवर्तन निदेशालय ने जब जांच की तो बहुजन समाज पार्टी के एक अकाउंट में विमुद्रीकरण के बाद से 100 करोड़ से ज्यादा की रकम आई।

बड़े नोटों के रूप में जमा कराये गये रूपयों में इस शाखा में स्थित बीएसपी के अकाउंट में करीब करीब हर दिन कई करोड़ों के रूपये डाले गये। बात मायावती तक ही सीमित नहीं है। उनके छोटे भाई आनंद कुमार का भी एक खाता करोलबाग की इसी शाखा में मिला है जिसमें कहा जा रहा है कि 1 करोड़ 40 लाख से ज्यादा की रकम है।

आनंद कुमार का नाम पहले भी सामने आ चुका है जब उन पर आरोप लगे थे कि नोएडा की कई रीयल स्टेट कंपनियों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से वो शामिल रहे है। इससे पहले आयकर विभाग ने नोएडा के कई बिल्डरों को नोटिस दिया था।

जाहिर है पूरा मामला बेहद संवेदनशील है इसलिए खबर के सामने आते ही सियासी हलकों में हडकंप मच गया। मायावती भी आरोपों पर सफाई देने के लिए मीडिया के सामने आयी और कहा कि पार्टी और भाई के सारे काम कानून के दायरे में हैं।

मायावती कुछ भी कह रही हों लेकिन सूत्रों की मानें तो प्रवर्तन निदेशालय इस मामले में जांच में तेजी से जुटा है। ईडी ने बैंक से सीसीटीवी फुटेज की मांग की है ताकि इस बात की जांच हो सके कि विमुद्रीकरण के बाद से इस शाखा में बड़े पैमाने पर किन किन लोगों ने बड़े पैमाने पर धन डाला।

जांच में तेजी तो हो ही रही है विरोधियों ने भी मायावती पर जोरदार हमला बोल दिया। राजनैतिक दलों को मिलने वाली फडिंग को पारदर्शी बनाने की मांग धीरे धीरे जोर पकड़ रही है।

खुद प्रधानमंत्री इस बात का जिक्र कर चुके है कि राजनीतिक दलों को मिलने वाली फडिंग को पारदर्शी बनाने के लिए व्यापक बहस होनी चाहिए। बहरहाल बसपा के खाते का पता चलने के बाद दूसरे दल भी जांच एजेंसियों के निशाने पर है।

         
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