00 अधिकारी निर्दोश लोगों को झूठे मामले में फंसाने का कर रहें है काम
00 खाद्य सुरक्षा अधिकारी नें दुकानदार से मांगी 15 हजार की रिश्वत
00 कमिश्नर के नाम पर पैसों की मांग
00 दुकानदार ने कलेक्टर व एसपी को सौंपी बातचीत की सीडी
00 सैंपल के नाम पर चार फैमली पैक केशर पिस्ता आईस्क्रीम निकलाया
00 दुकानदार ने अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने की मांग
रिपोर्ट / 07694071111/ अनुप बड़ेरियां –
कोरिया। जिले में युवा अधिकारी भी जमकर भ्रष्टाचार को अंजाम दे रहे है। कई बार मनचाही रिश्वत नहीं मिलने पर ऐसे अधिकारी निर्दोश लोगों को झूठे मामले में फंसा कर उन्हें परेशान करने से भी बाज नहीं आ रहे है। लेकिन कभी-कभी शेर को सवा शेर मिल ही जाता है। इस बार रिश्वत की मांग करने वाला अधिकारी पैसे न मिलने पर गलत प्रकरण तो दर्ज करवा दिया पर मोबाइल से पैसों की मांग ने उसे ही उसके बुनाए जाल में फंसा दिया। दरअसल लालच में अंधा सरकारी कर्मचारी भूल जाता है कि पैसों की हवस में वह जो कार्य कर रहा है वह कितना गलत है व कितना सही है। उसके इस कृत्य से कहीं कोई बेकसूर परेशान तो नहीं होने वाला है।
newspage13 को मिले तथ्यों व दस्तावेजों के अनुसार कोरिया जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में खाद्य एवं औषधि प्रशासन में कार्यरत् खाद्य सुरक्षा अधिकारी प्रशांत तिवारी 25 मई 2016 की दोपहर लगभग 12 बजे मेन रोड स्थित प्रार्थी अभय बड़ेरिया की श्री स्र्टोस नामक दुकान पर पहुंचे व लगभग 5 से 6 हजार रूपए का सामान निकलवाया व दुकानदार को अपना परिचय जिले के खाद्य निरीक्षक के रूप में देते हुए पैसे बाद में देने की बात कहीं। जिस पर दुकानदार अभय ने प्रशांत को न पहचानने व उधार सामान देने से इंकार कर दिया। जिसके बाद उक्त अधिकारी वहां से चला गया व दोपहर 3:30 बजे अपने साथ प्रमोद पैकरा नाम के व्यक्ति के साथ आ कर कहा कि उसे आईस्क्रीम के सैंपल की जांच करना है। इसके बाद उक्त अधिकारी ने टॉप एण्ड टॉउन कम्पनी के 4 फैमली पैक केशर पिस्ता आईस्क्रीम को सैंपल के नाम पर रख लिया। जबकि सैंपलिंग के नियमानुसार एक सैंपल सीलबंद कर दुकानदार के पास भी छोडऩा पड़ता है परंतु इस मामले में ऐसा नहीं किया गया। 31 मई को खाद्य सुरक्षा अधिकारी प्रशांत तिवारी ने अपने मोबाइल नंबर 9753540510 से अभय बड़ेरिया के मोबाइल नंबर 9407584485 पर फोन कर 15 हजार रूपए की मांग की गई और यह भी कहा गया कि यदि वह उक्त रकम दे देता है तो उसे कोई दिक्कत नहीं होगी व सैम्पल की रिर्पोट सही आएगी। लेकिन जब दुकानदार ने उतनी रकम देने से मना किया तो उसने कहा कि फिर जांच रिर्पोट गड़बड़ आ जाएगी। जिसके बाद प्रशांत तिवारी ने अगली काल पर मामला 10 हजार मे सेट करने की बात कहीं। उसने यह भी कहा कि उसके अंदर बहुत मानवता है परंतु रायपुर में कमिश्नर को भी पैसा देना पड़ता है। लेकिन जब दुकानदार ने पैसे नहीं दिए तो आईस्क्रीम की जांच रिर्पोट खाद्य सुरक्षा अधिकारी के मुताबिक आ ही गई। जिसके बाद अब दुकानदार को न्यायालय अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी एवं न्यायनिर्णयन अधिकारी कोरिया द्वारा नोटिस भी जारी कर दिया गया है। पीडि़त दुकानदार नें चेम्बर ऑफ कामर्स के पदाधिकारियों के साथ मिल कर कलेक्टर व एसपी को ज्ञापन व बातचीत की सीडी सौंपकर उक्त अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की मांग की है।
दुकानदारों से किया जाता है पैसों की सेंटिंग – हैरानी की बात यह है कि जहां सैम्पल जांच रायपुर जाता है और जांच रिर्पोट आने में कई महीनों लग जाते है वहीं सैंपल लेने के महज 6 दिनों बाद ही खाद्य सुरक्षा अधिकारी प्रशांत तिवारी को पता चल जाता है कि सैंपल की जांच रिर्पोट में क्या आने वाला है। जिसके बाद वह दुकानदार से पैसों की सेंटिंग में लग जाता है। इससे साफ है कि जब रिर्पोट सैंपल लेने वाले की पसंद की आती है तो कोरिया से लेकर रायपुर की इससे संबधित प्रयोगशाला के जिम्मेदार अधिकारी व कर्मचारी की मिली भगत हो सकती है। कुल मिलाकर जैसा पैसा वैसी रिर्पोट की संभावना दिखाई दे रही है जो जांच का विषय हो सकती है। क्योंकि इस प्रयोगशाला में पूरे छग से सैम्पल जांच के लिए जाते है।
विभिन्न दुकानों से लिया सैंपल – विभिन्न दुकानों से कुल 53 सैंपल लिए गए थे। जिसमें 41 सही पाए गए है। 6 अवमानक व 3 सैंपल मिस ब्रांडिंग मिले है। सैंपलों में छेना का रसगुल्ला, आईसक्रीम, गाय का दूध, अरहर दाल, खोवा, सील बंद पानी, आटा व पापड़ जैसी अनेक सामग्री शामिल है।
दुकानदार व खाद्य सुरक्षा अधिकारी के बीच बातचीत के कुछ अंश
दुकानदार : भैया से बात हुई थी, जो आप सैंपलिंग वाला 15 हजार बोले थे वो ज्यादा है। पहले आप 2 हजार बोले थे तो 5 हजार ले लीजिए।
प्रशांत तिवारी : आइए यहीं बात करते है। हम लोगों को ऊपर बात करना पड़ेगा। वो 2-4 हजार तो लायसेंस का रहता है। वो तो मैंने आपको लायसेंस के लिए बताया था।
दुकानदार : देख लीजिए 4-5 तक में करवा दीजिए।
प्रशांत तिवारी : ऊपर बात कर बताता हूं अगर कुछ गुंजाइश हो सकें तो।
दुकानदार : भैया से बात हुई वो बोल रहा था कि सैंपलिंग के लिए 15 हजार तो काफी ज्यादा है।
प्रशांत तिवारी : जो 24-25 साल से सैंपलिंग केस कर रहे है उनसे पूछिएगा कि सैंपलिंग का क्या होता है। मैने पहली बार सैंपलिंग की है तो आप को और एफबीओ को बचा कर ही की है। मैं चाहता तो आप तो जानते ही है कि मेरे अंदर भी मानवता है यार। और कोई इंस्पेक्टर होता तो आपके पूरे माल की जप्ती बना देता। मैंने कॉपरेट कर के काम किया है यार।
दुकानदार : फिर भी 15 हजार तो ज्यादा है सर।
प्रशांत तिवारी : हां अभय जी ऊपर बात हो गई है 10 करवा दीजिएगा।
दुकानदार : ठीक है सर भैया से बात कर बताता हूं।
प्रशांत तिवारी : क्या है, मैं कल रायपुर जा रहा हूं। जप्ती तो बना दिया हूं परंतु फिजीकल ऑन द पेपर नहीं किया हूं। केवल सामान भेज दिया हूं।
दुकानदार : कुछ और कम नहीं हो सकता।
प्रशांत तिवारी : नहीं यार, कमिश्नर कार्यालय तक देना पड़ता है न।
दुकानदार : ठीक है सर भैया आता है तो 4-5 तारीख तक करवाता हूं।
प्रशांत तिवारी द्वारा पूरे जिले में घूम-घूम कर खाद्य लायसेंस व सैम्पलिंग के नाम पर दुकानदारों को परेशान कर उगाही का कार्य किया जा रहा है। इसकी शिकायत कई दुकानदारों ने चैम्बर से की है।
-कमल केजरीवाल, अध्यक्ष चेम्बर ऑफ कामर्स कोरिया
सीएमएचओ से जानकारी लेकर मामले की जांच कराएगें।
-एस. प्रकाश, कलेक्टर कोरिया
newspage13 से कहा कि वह आवाज उसकी नहीं है किसी और ने उसकी आवाज निकाली है। मैने मोबाइल से फोन कर दुकानदार से पैसों की मांग नहीं की है।
-प्रशांत तिवारी, खाद्य सुरक्षा अधिकारी
