Advertisement Carousel

तीन तलाक पर 11 मई से रोजाना होगी सुनवाई – SC

दिल्ली /  तीन तलाक के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ 11 मई से रोजाना सुनवाई शुरु करेगी। इस बीच केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा है कि वह तीन तलाक, हलाला और बहु विवाह प्रथा की विरोध करती है।
केंद्र ने तीन तलाक व्यवस्था का फिर विरोध करते हुए कहा है कि ऐसी हर वो परंपरा महिला पुरुष समानता के खिलाफ है जो महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक या भावनात्मक रुप से कमज़ोर बनाती है।

सरकार ने तीन तलाक, हलाला और बहुविवाह प्रथा का विरोध करते हुए कहा है कि संविधान में सभी नागरिकों को अपने विश्वास और आस्था को मानने की आजादी दी गई है। लेकिन हर प्रथा को इस आस्था और विश्वास का अभिन्न हिस्सा नहीं कहा जा सकता।

धार्मिक प्रथाएं संविधान में दिये गये लैंगिक समानता, लैंगिक न्याय और गरिमा से जीवन जीने के संवैधानिक उद्देश्य के खिलाफ नहीं हो सकतीं।इससे पहले ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने तीन तलाक के खिलाफ दायर याचिकाओं का विरोध किया था।

इस मसले पर केंद्र का रुख इस प्रकार है——-

केंद्र ने किया तीन तलाक, हलाला और एक से ज्यादा विवाह का विरोध

संविधान में सभी नागरिकों को अपनी आस्था मानने की आजादी

लेकिन हर प्रथा आस्था का अभिन्न हिस्सा नहीं

धार्मिक प्रथाएं लैंगिक समानता, लैंगिक न्याय और गरिमा के खिलाफ नहीं जा सकतीं

तीन तलाक, एक से ज्यादा विवाह और हलाला इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं

वहीं मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की दलीलें कुछ इस प्रकार हैं —-

ये मसले न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं

तलाक को मूल अधिकारों के दायरे में नहीं देखा जा सकता

याचिकाओं को बिना इस्लामिक कानून समझे दायर किया गया

संविधान में सभी को अपने धर्म के मामलों में निर्णय लेने का अधिकार

याचिकाकर्ता निजी मसले को मूल अधिकार बता रहे हैं, लिहाजा इन पर विचार नहीं किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ इस मामले में 11 मई से सुनवाई शुरु करेगी।

error: Content is protected !!