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पढ़िए पुरी खबर फिर किस विवादों में फसें है लालू यादव…

बिहार /  हजारों करोड़ की बेनामी संपत्ति और चारा घोटाले के बाद लालू यादव और उनका परिवार एक और विवाद में फंस गया है। एक चिट्ठी से खुलासा हुआ है कि लालू यादव पिछले दिनों जब बीमार थे, तब तीन सरकारी डॉक्टर और दो नर्सों को अस्पताल का सारा काम छोड़कर लालू यादव के घर उनकी तीमारदारी के लिए तैनात कर दिया गया। ये मामला इसलिए बेहद गंभीर है, क्योंकि एक तरफ बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है, आम लोगों को डॉक्टरी इलाज नहीं मिल पा रहा है तो दूसरी तरफ लालू को ये वीआईपी सुविधा उपलब्ध कराने वाले खुद लालू के बेटे हैं, जो राज्य के स्वास्थ्य मंत्री हैं।
सैंया भये कोतवाल तो डर काहे का, ये कहावत भले ही पुरानी हो लेकिन बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव पर सटीक बैठती है। लालू के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव नीतीश कुमार की सरकार में स्वास्थ्य मंत्री हैं। अब जब बेटा ही स्वास्थ्य मंत्री हो तो डॉक्टरों की फौज की तैनाती घर पर क्यों न हो। जी हां, लालू पर आरोप लग रहा है कि इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज यानि आईजीआईएमएस की डॉक्टरों की एक टीम लालू की देखभाल के लिए नौ दिन उनके घर पर तैनात रही।

एक चिट्ठी से खुलासा हुआ है कि लालू के बीमार होने पर संस्थान के तीन बड़े डॉक्टर और दो मेल नर्स 31 मई, 2017 से लेकर 08 जून, 2017 तक लालू यादव के सरकारी आवास पर तैनात रहे। जाहिर है इस खुलासे ने बीजेपी को लालू पर हमले का मौका दे दिया। पार्टी का कहना है कि एक ओर राज्य में मरीजों को सही इलाज नहीं मिल रहा है, वहीं लालू सरकारी खर्चे पर घर पर बैठकर सरकारी डॉक्टरों से इलाज करवा रहे हैं।

वहीं, इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान का कहना है कि स्वास्थ्य मंत्री संस्थान के अध्यक्ष हैं, इसी वजह से उन्हें यह सुविधा दी गई थी। इस पूरे मामले में विपक्ष हमलावर है तो लालू की सहयोगी जेडीयू इस मामले में कुछ भी कहने से बच रही है। हालांकि कांग्रेस इसे ग़लत नहीं मान रही है।

नेता कुछ भी कह रहे हों लेकिन एक बात तो सच है कि बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था का बुरा हाल है। अस्पताल में डॉक्टरों की भारी कमी है, बावजूद इसके मरीजों को छोड़कर वीआईपी लोगों की तीमारदारी में सरकारी डॉक्टरों की तैनाती की जा रही है। अस्पतालों में मरीजों की संख्या को देखते हुए अस्पताल में सुविधाएं और डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है लेकिन अस्पतालों को तो वीआईपी लोगों की सेवा से ही फुर्सत नहीं है।

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