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बिल्डर के खिलाफ जारी है जन आंदोलन, प्रशासन की चुप्पी समझ से परे, सोशल मीडिया में चल रही जोरदार बहस

00 जन आंदोलन का 10वा दिन
कोरिया / बैकुंठपुर में शासकीय जमीन के फर्जीवाड़े को लेकर पूर्व नपाध्यक्ष शैलेष शिवहरे के नेतृत्व में जन आंदोलन पिछले 4 सितम्बर से शुरू किया गया है।

जिसके तहत नगरपालिका काम्प्लेक्स में शहर के लोग शामिल होकर लगातार अपना समर्थन दे रहे हैं तो वहीं पूर्व में कांग्रेस सहित भाजपा के नेताओं ने भी जन आंदोलन में अपना समर्थन देकर कार्यवाही की मांग की थी।

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ज्ञात हो कि तलवापारा में लगभग 4.5 एकड़ शासकीय जमीन जो कि कॉलेज के ठीक बगल में स्थित है इसे वर्ष 2014 में स्थानीय बिल्डर संजय अग्रवाल ने इस नाम पर अपने आनी स्थित जमीन से अदला बदली करा लिया था कि उसे आनी की जमीन में खेती करने में परेशानी हो रही है और वह तलवापारा की उक्त जमीन में खेती कार्य करेगा, यह बात एकदम समझ से परे और हास्यापद है। इसके अदला बदली के दस्तावेज में भी पहली नजर में कूटरचित किया जाना प्रतीत हो रहा है। नियम विरुद्ध हुए इस अदला बदली में पटवारी की भूमिका महत्वपूर्ण थी साथ ही तात्कालिक अपर कलेक्टर एडमंड लकड़ा ने इसमें अहम रोल अदा किया था। इस घोटाले को लेकर 22 अगस्त को नगर के एक प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर को ज्ञापन देकर कार्यवाही की मांग की जिसके बाद कार्यवाही न होने पर उनके द्वारा 4 तारीख से जन आंदोलन किया जा रहा है। यही नही जब मंगलवार तक कोई कार्यवाही नही हुई तब आंदोलकारियों ने बुधवार से क्रमिक भूख हड़ताल भी वहीं शुरू कर दिया है। जो कि आज भी जारी रहा।

बीच मे कुद चुकी थी गोंगपा –

गोंगपा ने एक पुराने मामले में जो कि न्यायलय में विचाराधीन है और जन आंदोलन कर रहे शैलेष शिवहरे के खिलाफ है उसे कलेक्टर कोरिया को जांच कराने की मांग की थी और यह सोचा था कि मामले को घुमा कर नया कर दिया जाए। पर ऐसा होता कुछ दिखाई नही पड़ रहा। मामले में सूरजपुर जिले के गोंगपा नेता ने स्वयं आ कर कलेक्टर कोरिया से शिकायत की थी।

प्रशासन को किसका डर है –

वहीं इस पूरे मामले में प्रशासन द्वारा भले ही अपने स्तर पर कागजी कार्यवाही चल रही हो लेकिन आंदोलन के सम्बंध में प्रशासन की चुप्पी समझ से परे है। जिससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि बिल्डर के काले कारनामो में प्रशासन अपने हाथ नही डालना चाहता। सूत्रों की माने तो प्रशासन अगर इसमे कार्यवाही शुरू करता है तो पहले कई अधिकारी कर्मचारी पर गाज गिरेगी। जिससे प्रशासन अभी कार्यवाही करने से बच रही है।

विवाद अब सोशल मीडिया में हो रहा गरम

जन आंदोलन के तहत इसकी गूंज सोशल मीडिया फेसबुक और वाट्सअप पर भी देखने को मिल रही है। दोनों के समर्थक अपने – अपने बातो पर एक दूसरे पर आरोप मढ़ रहे हैं और नए विवादों को जन्म दे रहे है।


राजनैतिक से अब धार्मिक न हो जाए ये लड़ाई –

यह लड़ाई सोशल मीडिया में अब धार्मिक रूप भी लेते दिख रही है। दोनों गुट के समर्थक हिंदूवादी चेहरा ही हैं और जमीन से जुड़ा मामला अब धार्मिक कार्यों को लेकर बहस का हिस्सा बन चुका है। बिल्डर संजय अग्रवाल ने पिछले साल धार्मिक विवाद के बाद भाजपा से इस्तीफा दे कर श्री राम सेना जॉइन कर लिया था तब से वे हिंदुत्व का राग भी अलाप रहे थे हालांकि इससे पहले धार्मिक क्षेत्र में उनकी सक्रियता एकदम शून्य थी इन सभी बातों को लेकर अब धार्मिक विवाद भी सोशल मीडिया में बढ़ गया है। समर्थक तमाम ऊलजलूल आरोप लगाकर एक दूसरे को नीचा दिखाने का प्रयास कर रहे हैं।

बहरहाल यह कहा जा सकता है कि यदि आने वाले कुछ दिनों में प्रशासन ठोस हल नही निकालता तो यह घटना कोई हिंसक रूप ने ले। जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन को उठानी पड़ सकती है।

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