दिल्ली / केंद्र की एनडीए सरकार देश के सभी वर्गों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है, ख़ास तौर पर महिलाओं के विकास, सुरक्षा और सशक्तिकरण को लेकर समय समय पर कई पहल किए गए हैं। बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में कई महत्वपूर्ण फ़ैसले लिए।
सशक्त महिलाएं .. हिंसा व भेदभाव से मुक्त वातावरण में सम्मान सहित जीते हुए देश की प्रगति में बराबर योगदान दे सकती हैं, इसी सोच के तहत देश की आधी आबादी यानि महिलाओं के सशक्तिकरण और सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फ़ैसला लिया है। वित्त मामलों की कैबिनेट समिति ने पीएम मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को अम्ब्रेला स्कीम महिलाओं के लिए सुरक्षा और सशक्तिकरण मिशन के तहत महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की योजनाओं के विस्तार के लिए वर्ष 2017-18 से लेकर 2019-20 की अवधि के लिए अपनी मंजूरी प्रदान कर दी है।
महिला सशक्तीकरण के लिए सरकार ने देश के 115 अति पिछड़े जिलों में नई योजना प्रधानमंत्री महिला शक्ति केंद्र को मंजूरी दी है। इन केंद्रों के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को केंद्र सरकार से जुड़ी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी, ट्रेनिंग और सामुदायिक भागीदारी के ज़रिए क्षमता विकास पर ज़ोर दिया जाएगा । दूरदराज के इलाकों में जागरूकता फैलाने के लिए लगभग 3 लाख छात्र बनेंगे बदलाव के एजेंट और उन्हे मिलेगा समाज सेवा के लिए प्रमाणपत्र।
कैबिनेट समिति द्वारा बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ योजना को विस्तार दिया गया है, 161 जिलों में ही चल रही इस योजना की सकारात्मक रिपोर्ट्स के बाद अब ये देश के सभी 640 जिलों में लागू होगी। शुरुआत उन ज़िलों से होगी जहां शिशु लिंगानुपात दर काफी कम है।
हिंसा से पीड़ित महिलाओं के लिए 150 से ज्यादा जिलों में ‘वन स्टॉप सेंटर्स’ खोले जाएंगे। जिन्हें महिला हेल्पलाइन के साथ जोड़ा जाएगा । महिला पुलिस वॉलंटियर्स की भागीदारी बढ़ाई जाएगी. इसके अलावा कामकाजी महिलाओं के लिए 190 वर्किंग विमन हॉस्टिल्ज़ बनाए जाएँगे।
सभी योजनाओं की समीक्षा और मॉनिटरिंग के लिए राष्ट्रीय, राज्य और जिलास्तर पर कार्यबल गठित किया जाएगा, इन योजनाओं के लिए वित्त वर्ष 2017-18 से 2019-20 तक वित्तीय खर्च लगभग 3600 करोड़ रुपये (3636.85 करोड़ ) रखा गया है।
देश की आधी आबादी को देश के विकास में योगदान देने के अवसर प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं केबिनेट के ये फ़ैसले।
