** 1980-90 में लिखी इन कहानियो का अनुठा संग्रह है यह किताब
** वरिष्ठ पत्रकार नेसार नाज की किताब “हांफता हुआ शोर” का विश्व पुस्तक मेला में हुआ प्रकाशन
** आईएएस संजय अलंग के प्रयासो से मिला मंच
** पत्रकार फारूख ढे़बर ने भी की मदद
** साथियों में हर्ष
कोरिया / बैकुन्ठपुर के वरिष्ठ पत्रकार नेसार नाज की लिखी किताब “हांफता हुआ शोर” का प्रकाशन 6 जनवरी को विश्व पुस्तक मेला दिल्ली के किताबघर द्वारा किया गया। नेसार नाज की इस उपलब्धि पर जिले सहित छग के अनेक वरिष्ठ लोगो ने उन्हे बधाई दी है। इस पुस्तक में 11 कीनियो का संग्रह है।

दरअसल नेसार नाज 1980-90 दौर के काफी तेजतर्रार व ईमानदार पत्रकार के रूप में जाने जाते रहे है। कलम के इस जादूगर के पास पैनी कलम के साथ शब्दो की इतनी जादूगरी भी थी की लोग प्रकाशन के एक दिन बाद बैकुन्ठपुर पहुंचने वाले अखबार का बेसब्री से इंतजार करते थे। पाठक श्री नाज की लेखनी के कायल हो चुके थे। दैनिक भास्कर व देशबंधु जैसे बड़े अखबार में काम करने के बावजुद अपनी कड़क व ईमानदार छवि की वजह से नेसार सदैव अर्थाभाव से जूझते रहे। फिर अपनी व पत्नी की बीमारी ने इन्हे कलम से लंबे अरसे के लिए दूर कर दिया। पर कहते हैं कि प्रतिभा कभी छुप नही सकती। इनकी प्रतिभा को आरंभ से ही बैकुन्ठपुर निवासी व हाईकोर्ट के प्रसिद्व अधिवक्ता महेन्द्र दुबे पहचनाते रहे है। उचित समय पर उन्होनें बैकुन्ठपुर में ही पले – बढ़े छग सरकार में आईएस पूर्व मुगंली कलेक्टर व समाज कल्याण विभाग में संचालक डां. संजय अलंग से प्रतिभावान नेसार नाज की चर्चा की। इस पर नेसार द्वारा लिखी कहानियो पर किताब प्रकाशन पर चर्चा चली और लगभग 1980-90 में लिखी इन कहानियो को खोजना भी इतना आसान नही था। घर पर नेसार ने जब कहानियों के पन्नों को खोजना आरंभ किया तो पता चला कि उन कागजो को रद्दी समझ कर उनकी धर्मपत्नी ने उसे रद्दी वाले का बेच दिया है। जिस पर श्री नेसार एक बार फिर उदास हो गए थे। परंतु कहते है कि जब किस्मत आपको शोहरत देना चाहती है तो उसे कोई भी नही रोक सकता। उनके मित्र व वरिष्ठ पत्रकार फारूख ढे़बर के पास श्री नेसार की सारी कहानियो का संग्रह यकायक मिल गया। जिसके बाद उनकी किताब “हांफता हुआ शोर” का प्रकाशन संभव हो सका।
आपको बता दे कि इस पुस्तक का संपादन डॉ. संजय अलंग ने किया है। आवरण चित्र डॉ. सुमित्रा अलंग व प्रस्तावना अनवर हुसैन की प्रस्तुति है।
