बिलासपुर / छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फर्जी दस्तावेज से जमानत लेने के बड़े मामले को रोकने के लिए जरूरी दिशा निर्देश जारी किए हैं। अब जमानतदार को प्रतिभूति के साथ आधार नंबर भी देना होगा। कोर्ट दस्तावेज और आधार कार्ड की जांच के बाद ही अब रिहाई के आदेश जारी करेगा।
आपको बता दे कि मामले में जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने एमसीआरसी 439 के तहत प्रस्तुत होने वाले जमानत आवेदन पर जमानतदार और आरोपी का यूआईएन आधार नंबर अनिवार्य किया है। अब ट्रायल कोर्ट में जमानत दस्तावेज के साथ आधार कार्ड की फोटोकॉपी लेनी जरूरी है। न्यायाधीश एक सप्ताह के अंदर राजस्व दस्तावेज, आधार कार्ड समेत अन्य दस्तावेज की जांच करेंगे। इसके बाद ही आरोपी की जेल से रिहाई का आदेश जारी होगा। कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि गलत दस्तावेज या आधार नंबर प्रस्तुत करने वालों के खिलाफ 4 सप्ताह में एफआईआर दर्ज करनी होगी।लिहाजा, इसके लिए सभी कोर्ट में एक इलेक्ट्रॉनिक डाटाबेस रजिस्टर रखना होगा. इसमें केस नंबर, क्राईम नंबर, आरोपी और पुलिस स्टेशन का विवरण होगा। जस्टिस मिश्रा ने रजिस्ट्रार जनरल को आदेश की कॉपी सभी जिला न्यायाधीशों को भेजने और जिला एवं सत्र न्यायाधीश को अपने अधीनस्थ न्यायाधीश, सिविल जज को भेजने के निर्देश दिए हैं। इसी प्रकार आदेश की प्रति कलेक्टर के माध्यम से एसपी और अन्य सभी थानों को भेजने के लिए कहा है। वहीं इसका पालन नहीं करने वाले न्यायाधीश, सिविल जज के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की चेतावनी दी है।
आदेश के मुताबिक अब एक पट्टा सिर्फ दो प्रकरणों में पेश होगा। हाईकोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक एक पट्टे से दो से ज्यादा जमानत नहीं मिलेगी। साथ ही इससे जमानत लेने का धंधा करने वालों पर रोक लग जाएगा।
