** पिछले दो विधानसभा में तीनो सीट पर गोंडवाना रही कांग्रेस की हार का कारण
** आंकड़े बताते है हर पंचवर्षीय बढ़ रही गोंडवाना की ताकत
अनूप बडे़रिया की खास रिर्पोट….
कोरिया / छग विधानसभा चुनावो में अब लगभग 9-10 माह का समय ही शेष बचा है। ऐसे में प्रमुख राजनीतिक दलो के साथ उन दलो के संभावित प्रत्याशी भी प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से मैदान में सक्रिय हो चले है। कोरिया जिले की तीनो विधानसभा सीट बैकुन्ठपुर, मनेन्द्रगढ़ व भरतपुर-सोनहत में पिछले दो चुनावो से भाजपा ही जीत रही है। कोरिया में कांग्रेस 3-0 से लगातार पिछड़ रही है। कांग्रेस की लगातार इस हार के पीछे राजनीतिक पंडित कहीं न कहीं गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की पार्टी के बढ़ रहे जनाधार को मान रही है। 2008 के मुकाबले 2013 में गोंगपा का वोट बैंक 95 फीसदी बढ़ा है। जो काफी हद तक अप्रत्याषित है।
राजनीतिक विशेषज्ञ मानते है कि गोंड समुदाय के वोट कांग्रेस के परम्परागत वोट रहें है। लेकिन गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के खुद चुनाव में उतरने से सारे वोट गोंगपा की ओर डायवर्ट हो गए है। तीनो विधानसभा में गोंडवाना 10-13 फीसदी मत प्राप्त करने में लगातार कामयाब हो रही है। जो कांग्रेस की हार का कारण बन रही है। 2008 व 2013 के चुनावों में कांग्रेस के बड़े नेताओ नें गोंडवाना गणतंत्र पार्टी को हल्के में लिया तो नतीजा सबके सामने है। अब तो जोगी कांगेस के रूप में चौथी शक्ति कांग्रेस के लिए करेला ऊपर से नीम चढ़ा वाली कहावत को चरितार्थ कर रही है। सूत्रो की माने तो अब कांग्रेस गोंगपा को काफी गंभीरता से लेने के मूड में दिख रही है। कांगेस के एक बड़े नेता व हाल ही में कोरिया प्रवास पर रहे एक दिग्गज नेता की माने तो कांगेस इस बार गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से समझौते के दिशा में कदम बढ़ा सकती है। अनुमानित समझौते के अनुसार छग की भरतपुर-सोनहत, पाली तानाखार व पामगढ़ को कांगेस गोंडवाना को दे सकती है। मतलब इन तीन सीट पर गोंगपा के प्रत्याशी चुनाव लड़ सकते व कांगेस यहां से अपना उम्मीदवार नही उतार सकती है। इस स्थिति में गोंगपा बाकी अन्य सीट पर अपने प्रत्याशी नही उतारेगी। जिसका फायदा कांग्रेस को मिल सकता है।

यदि पिछले दो पंचवर्षीय चुनाव को छोड़ दिया जाए तो कोरिया जिले की दोनो विधानसभा सीट बैकुन्ठपुर व मनेन्द्रगढ़ में लगातार कांग्रेस का परचम लहराया है। विधानसभा बैकुन्ठपुर में तो 2003 तक कांग्रेस का परचम लहराता रहा है। कोरिया पैलेस के डां. रामचंद्र सिंहदेव लगातार 6 बार अपराजेय योद्वा रहे हैं। केवल 1985 में डां. रामचंद्र को जब कांग्रेस ने टिकट नही दिया तभी यहां से भाजपा के द्वारिका प्रसाद गुप्ता को चुनाव में जीत हासिल हो सकी थी। 1951, 1962 व 1977 में जनसंघ के ज्वालाप्रसाद उपाध्याय की जीत के बाद भाजपा के रूप में पहली व आखिरी जीत द्वारिका गुप्ता को ही हुई थी। जिन्होने 1531 मतो से सरगुजा पैलेस की श्रीमती देवेन्द्र कुमारी (वर्तमान छग नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव की मां को पराजित किया था। इसके बाद कोरिया पैलेस के रूप में कोरिया कुमार का लगातार दबदबा बना रहा। 2003 का चुनाव जीतने के बाद 2008 के विधानसभा चुनाव के पूर्व उन्होनें अघोषित रूप से राजनीति से सन्यास ले लिया।
लेकिन इस बीच तीसरी शक्ति के रूप में कोरिया जिले के खासकर बैकुन्ठपुर विधानसभा में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने अपनी पैठ बनाना आरंभ कर दिया था। 2003 के चुनाव में गोेंडवाना ने जहां लगभग 5 हजार के आंकड़े को छूने का प्रयास किया। वहीं 2008 के चुनाव में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के रामदुलार सिंह अयाम ने 9,428 मत प्राप्त किए तो 2013 के चुनाव में इसी पार्टी के युवा इंजीनियर संजय सिंह कमरो ने 17,413 मत प्राप्त कर कांग्रेस की उम्मीदो को नेस्तनाबूत कर दिया था। यहां कांग्रेस की हार का अंतर क्रमश 5536 व 1069 रहा है। मनेन्द्रगढ़ विधानसभा सीट पर 2008 में गोंगपा के अमीर सिंह श्याम ने 7393 व 2013 में पवनकुमार नेटी ने 9747 मत प्राप्त किए। इसी प्रकार भरतपुर-सोनहत सीट पर वर्ष 2008 में यषवंत गोंड ने 9117 व 2013 में कनसलाल ने 18,188 मत प्राप्त कर कांगे्रस की ताबूत में आखिरी कील ठोकने काम किया। यहां भी कांग्रेस की हार का अंतर क्रमषः 7298 व 4608 रहा है। इस प्रकार यदि देखा जाए तो कोरिया में यदि कांग्रेस लगातार दो बार से लगातार चुनाव हार रही है तो उसका पूरा श्रेय गोंगपा को ही जाता है। इसके अलावा गोंडवाना गणतंत्र पार्टी लगातार अपनी ताकत का इजाफा कर अब शहरी क्षेत्र में भी अपनी पैठ जमाने की जुगत में है। नगरीय निकाय के चुनाव में जोर आजमाईश के अलावा जिला पंचायत में भी अपने तीन सदस्य निर्वाचित करा कर उपाध्यक्ष पद गोंडवाना गणतंत्र पार्टी हासिल कर चुका है। इसलिए कांग्रेस इस बार गोंगपा से समझौते के पूरे मूड में दिख रही है। प्रदेश स्तर के बड़े नेताओ के अलावा जिले के भी कई कांग्रेसियों ने इस बात की संभावना से इंकार नही किया है। वैसे इस सीट से कांग्रेस के गुलाब कमरो इकलौते उम्मीदवार नजर आ रहे है। पिछले बार भी कांग्रेस ने कमरो को ही टिकट दिया था। लेकिन चुनाव हारने के बाद भी वह लगातार अपने क्षेत्र में सक्रिय हो कर 4 सालों से भाजपा की नाक में दम किए हुए है।
बहरहाल हालात जो भीं हो राजनीतिक गलियारों में चर्चा जोरो पर है कि भरतपुर-सोनहत सीट यदि कांग्रेस गोंडवाना का समझौते में देती है तो कोरिया में कांग्रेस को लाभ हो सकता है।
