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ठंड क्या बढ़ी पालिका प्रशासन की मानवता ही मर गई, 2 सप्ताह से अलाव नही जली

00 कड़ाके की ठंड के बावजूद पालिका प्रशासन ने नहीं की अलाव की व्यवस्था

कोरिया / एक ओर शहर में ठंड बढ़ने लगी है, दूसरी ओर घड़ी चौक व बस स्टैंड समेत सार्वजनिक स्थानों में पिछले 2 सप्ताह से अलाव की व्यवस्था नहीं की गई है। इससे शाम और रात के समय राहगीरों, यात्रियों को ठंड की मार झेलनी पड़ रही है। बारिस और उसके बाद मौसम साफ होते ही जिले में अब कड़ाके की ठंड पड़ने लगी है। जिस कारण सोमवार को शहर के जागरूक लोगों ने स्थानीय घड़ी चौक पर स्वयं के खर्चे से अलाव जलाने का फ़ैसला किया।

लोगों को रात के अलावा सुबह शाम के समय गर्म कपड़ों का सहारा लेना पड़ रहा है। सुबह के समय धूप से कुछ राहत मिल जाती है। लेकिन शाम के समय ठंड का असर शुरू हो जाता है। जैसे-जैसे रात चढ़ती जाती है वैसे-वैसे तापमान गिरने लगता है और ठंड बढ़ता जाता है। राहगीर यात्री वर्ग ठंड की ज्यादा मार झेलते हैं। प्रतिवर्ष ठंड बढ़ते ही नगर निगम द्वारा लोगों को राहत दिलाने के लिए शहरी-उपनगरीय क्षेत्र में बस स्टैंड समेत प्रमुख चौक-चौराहों में अलाव की व्यवस्था की जाती है। लेकिन पिछले 2 सप्ताह से पालिका के द्वारा अलाव की व्यवस्था नहीं की जा रही है। इसके कारण रात के समय लोगों को खुले में ठंड से बचने के लिए कोई साधन नहीं मिल रहा है। जबकि रात बढ़ते ही पारा गिरने से खुले में गर्म कपड़े भी असर नहीं करते हैं। इस वजह से रात के समय में सफर करने वाले राहगीर ठंड से परेशान हो रहे हैं। खासकर बस स्टैंड में पहुंचने वाले यात्रियों को ठंड से रात भर जूझना पड़ रहा है।

ठंड का असर ग्रामीण अंचल में भी हो रहा है। जहां शाम होते ही ग्रामीण पैरा का उपयोग कर अलाव जला रहे हैं। इसके अलावा घरों में गोरसी में गोबर के कंडे, लकड़ी जलाकर ठंड से बचने का प्रयास किया जा रहा है। शहरी क्षेत्रों में ज्यादातर घरों में रात के समय ठंड से बचने के लिए रूम हीटर का भी उपयोग किया जा रहा है।

जनवरी माह में अचानक हुई बारिश से इन दिनों कड़ाके की ठंड शुरू हो गई है, नगर पालिका व प्रशासन द्वारा शुरुआत में तो अलाव की व्यवस्था की गई थी, लेकिन पिछले 2 सप्ताह से ठंड से बचाव के लिए शहर के विभिन्न चौराहों पर अलाव नही जलाया जा रहा है।

जिस कारण सोमवार को शहर के जागरूक लोगों ने स्थानीय घड़ी चौक पर स्वयं के खर्चे से अलाव जलाने का फ़ैसला किया। जिसमें गौ रक्षक अनुराग दुबे, कमलेश गुप्ता, अमिताभ गुप्ता, अभय दुबे, आयुष नामदेव, प्रभाकर सिंह ने सराहनीय योगदान दिया।

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