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SECL बैकुण्ठपुर के महाप्रबंधक व चरचा के उप क्षेत्रीय प्रबंधक को HC का अवमानना मामले में नोटिस जारी, 1 सप्ताह में दूसरी बार नोटिस हुआ जारी…

कोरिया से नीरज गुप्ता / SECL बैकुंठपुर क्षेत्र के महाप्रबंधक शंकर नागा चारी व चरचा कॉलरी के उप क्षेत्रीय प्रबंधक को माननीय उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ द्वारा न्यायालय की अवमानना के प्रकरण में नोटिस जारी किया गया है।

गौरतलब हो कि मात्र 5 दिनों की अवधि में उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ द्वारा बैकुंठपुर क्षेत्र प्रबंधन को लगातार दो बार अवमानना का नोटिस जारी किया गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि बैकुंठपुर क्षेत्र अपने दायित्वों का निर्वहन के प्रति सजग नहीं है, उच्च न्यायालय द्वारा 30 जनवरी को एक प्रकरण में नोटिस जारी किया गया था। वहीं 6 फरवरी को एक दूसरे प्रकरण में दूसरा नोटिस जारी हो गया है।

विदित हो कि बैकुंठपुर क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों, कर्मचारियों की समस्याओं का निदान त्वरित रूप से नहीं किया जाता हैै। कर्मचारी कार्यालय के चक्कर लगाते लगाते परेशान हो जाते हैं और अंततः उन्हें न्याय हेतु न्यायालय की शरण में जाना पड़ता है।

यह है मामला….

चरचा कॉलरी के कर्मचारी अशोक निर्मलकर, मोहनलाल बीपी आदि कुछ कर्मचारी जो कि तत्कालीन समय में स्पेशल पीस रेटेड मजदूर पे लोडर कैटेगरी 6 के पद पर काम करते थे व ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड से ट्रांसफर होकर नवंबर 2000 में चरचा कॉलरी में आए, चरचा में जॉइनिंग लेने के बाद कालरी प्रबंधन द्वारा उन्हें नवनियुक्त मजदूर की श्रेणी में कैटेगरी 1 मजदूर के वेतन का भुगतान किया जाने लगा। जिससे इन श्रमिकों को काफी आर्थिक क्षति होने लगी जिस पर इन्होंने आपत्ति दर्ज की और कालरी प्रबंधन के समक्ष लगातार आवेदन कर वेतन विसंगति के साथ न्याय की मांग करते न्याय की मांग करते रहे थे, किंतु 18 वर्षों की अवधि गुजर जाने के बावजूद इन की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया। जिससे विवश होकर इन्होंने उच्च न्यायालय के अधिवक्ता माजिद अली के माध्यम से उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की, मामले की सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने जुलाई 2018 में आदेश पारित कर 75 दिनों की अवधि में मामले को निराकृत करने का आदेश किया। आदेश के बावजूद कालरी प्रबंधन द्वारा कोई रुचि नहीं दिखाई गई और कोई कार्यवाही नहीं की गई। जिस पर अधिवक्ता माजिद अली ने न्यायालय में अवमानना की याचिका दायर किया, जिस पर उच्च न्यायालय ने 2 सप्ताह की समय सीमा की अवधि के अंदर प्रबंधन को अपना जवाब रखने का आदेश दिया। इसी क्रम में कालरी कर्मचारी मोहनलाल बीपी की याचिका पर दिनांक 6 फरवरी को उच्च न्यायालय ने SECL प्रबंधन बैकुंठपुर क्षेत्र को न्यायालय की अवमानना का नोटिस जारी किया।

बैकुंठपुर क्षेत्र में श्रमिक समस्याओं का अंबार है यूं तो कालरी क्षेत्र में 5 श्रमिक संघ कार्यरत है किंतु गंभीर समस्याओं के निदान के प्रति वह भी आँखें बंद किए रहते हैं।
अवमानना पर सजा का है प्रावधान….

अधिवक्ता माजिद अली ने बताया कि माननीय उच्च न्यायालय के किसी भी आदेश की अवमानना, अवहेलना एक गंभीर अपराध है। कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट एक्ट 1971 के अंतर्गत उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना करने पर व्यक्ति को 6 माह की सजा तक का प्रावधान है।

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