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बड़काघाघी व्यपवर्तन योजना में बिना टेंडर जल संसाधन विभाग ने खरीदे करोड़ो के पाइप…

कोरिया / ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के भूमि को सिंचित कर उनके कृषि आय को बढ़ाने एवं कृषको को समृद्ध बनाने के उद्देश्य से डायवर्सन, टैंक, एनीकेट जैसे महत्त्वपूर्ण योजनाओ पर शासन करोड़ो रूपये खर्च करती है। लेकिन जल संसाधन विभाग में बैठे कुछ अधिकारी शासन की इस महत्त्वपूर्ण योजना को मट्टी पलीद करने में कोई कसर नही छोड़ रहे है।

कोरिया जिले के खड़गवां विकास खंड के ग्राम गणेशपुर में करोड़ो की लागत से बनने वाली खेराखाड़ी डायवर्शन योजना अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। विभाग की हीलाहवाली और ठेकेदार की मनमानी के चलते लाखो रुपये के लगभग पांच सौ पाइप अपने लगने का इंतजार विगत तीन वर्षों से कर रहे हैं।

वहां के ग्रामीणों ने बताया कि डायवर्सन कार्य प्रारंभ होने के पूर्व ही सैकड़ो पाइप सिंचाई विभाग द्वारा लाकर गांव में गिरा दिया गया है। बाद में गांव के आसपास 15 से 20 फीट तक पाइए बिछाने के लिये गड्ढे खोदे गये है। पाइप को गड्ढे में नही डालने से बारिस के समय गड्ढे में पानी भरने की वजह से आमजन सहित मवेशियों को आने जाने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। कभी कभार रात के अंधरे में मवेशी गड्ढो में गिर जाते है जिससे उनकी मौत भी हो जाती है। पानी भरने के कारण पिछले वर्ष गांव की एक महिला के डूबने से मौत भी हो चुकी है।

ग्रामीणों ने बताया कि विभाग के द्वारा बस्ती में गिराए गए पाइप के आसपास स्कूली बच्चे खेलते रहते हैं अचानक पाइप के लुढ़क जाने से कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना घट सकती है।

कुछ ग्राम वासियों का कहना है कि उनके खेत में बिना मुआवजा दिए ही पाइप गिरा दिये हैं जिसकी वजह से किसान फ़सल का लाभ भी नहीं ले पा रहे हैं। ग्रामवासियों ने बताया कि लगभग दो वर्ष बीतने के बाद भी सिंचाई विभाग के किसी भी अधिकारी के दर्शन नही हुए है। इस महत्त्वपूर्ण योजना का कार्य पूरा नही होने के कारण ग्रामवासियों में भारी रोष है। उनका कहना है कार्य पूरा करना ही नही था तो विभाग द्वारा करोड़ो रुपये पाइप तथा गड्ढे खोदने पर कर खर्च क्यों किया गया।

खेराखाड़ी डायवर्शन के नाम पर जलसंसाधन विभाग ने करोड़ो फूंक डाले लेकिन अभी न तो डायवर्सन का काम पूरा हो सका और न ही किसानों के खेतों को पानी का एक बूंद नसीब हुआ। खेराखाड़ी डायवर्शन योजना में राजस्व के साथ वनविभाग की भूमि भी शामिल है।

खड़गवां विकास खण्ड के अनुविभागीय अधिकारी जल संसाधन विभाग के टोप्पो साहब ने बताया की खेराखाड़ी डायवर्सन का काम अधूरे में ही लटका है। वनभूमि के लिए सक्षम अधिकारी से अनुमति के सम्बंध में उन्होंने बताया कि इसकी प्रक्रिया चल रही है लेकिन कार्य करने के अनुमति वनविभाग से अभी तक नही मिला है। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि वन विभाग के जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारी अपने कार्य के प्रति कितने जिम्मेदार है।

जल संसाधन विभाग बैकुण्ठपुर द्वारा डायवर्शन योजना पर पाइप खरीदी का ताजा मामला जिले के मनेन्द्रगढ़ विकासखंड के ग्राम शेरामथानी स्थित बड़काघाघी व्यपवर्तन योजना का है। 8 करोड़ 72 लाख की लागत के राशि से बनने जा रहा बड़का घाघी डायवर्सन योजना वन विभाग के भूमि पर प्रस्तावित है।

सूत्रों के अनुसार उक्त योजना का निविदा  प्रक्रिया पूरी किये बिना ही कार्यपालन अभियंता और एसडीओ के द्वारा 2 करोड़ 80 लाख रुपये के पाइप खरीद लिए गए है। जल संसाधन विभाग के उपसंभाग मनेन्द्रगढ़ के एसडीओ जेपी राय ने बताया कि बिना निविदा प्रक्रिया के भी पाइप खरीद सकते हैं। जब उनसे वन विभाग से अनुमति के संबंध में जानना चाहा तो एसडीओ राय ने कहा कि फॉरेस्ट क्लीयरेंस लेने के चक्कर मे बहुत समय लग जाता है इस वजह से कार्य का लागत और बढ़ जाता है इसलिए निर्माण कार्य और क्लीयरेंस का काम साथ में ही होते रहता है और हम लोग ऐसा ही करते है। उनके इस कथन से ऐसा प्रतीत होता है की पर्यावरण के लिए बनाये गए नियमों से जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को कोई सरोकार नही है। शायद इसलिए पर्यावरण नियमों की खुलेआम धज्जी उड़ा रहे है। ऐसे अधिकारियों पर वन विभाग भी कार्यवाही के बजाये उनके साथ कदम ताल कर रहा है।

बड़का घाघी डायवर्सन योजना मनेन्द्रगढ़ वनमंडल के ग्राम शेरामथानी से 2 km अंदर वन भमि के कक्ष क्रमांक 902 में बनना प्रस्तावित है लेकिन इसके लिए जल संसाधन विभाग को वन विभाग की मंजूरी नही मिल पाई है।

वनमण्डलाधिकारी मनेन्द्रगढ़ से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी में नही है और बिना अनुमति कार्य करने पर कार्यवाही की बात कही। इस तारतम्य में उन्होंने तत्काल उपवनमण्डल अधिकारी केल्हारी को पत्र जारी कर बडका घाघी डायवर्सन योजना पर कार्य चलने की स्थिति में वन प्रकरण तैयार करने का आदेश देकर अपना पल्ला झाड़ लिया।

बता दे कि जल संसाधन विभाग ने लगभग पाँच सौ पाइप का क्रय खेराखाड़ी डायवर्सन के लिए तीन वर्ष पहले ही किया है जिसका उपयोग उक्त डायवर्सन में अब तक नही किया गया है इस वजह से लाखों के पाइप बेकार ही पड़े है। जल संसाधन विभाग के अधिकारी अगर चाहते तो खेराखाड़ी डायवर्सन में बेकार पड़े पाइपों को बड़काघाघी व्यपवर्तन योजना में लगा कर शासन का करोड़ो रूपये बचा सकते थे।

यह बात तो तय है कि जिले भर में अन्य विभागों के द्वारा वनभूमि पर कराये जा रहे निर्माण कार्यों के पूर्व फॉरेस्ट क्लीयरेंस की जांच के साथ जल संसाधन विभाग बैकुंठपुर के द्वारा जिले भर में करोड़ों के पाइप खरीदी के नियमो की जांच निष्पक्ष रूप से किया जाए तो कमीशन खोरी का बड़ा मामला सामने आ सकता है।

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