कोरिया / डीएफओ मनीष कश्यप पर हिटलरशाही का आरोप लगाते हुए वन विभाग के कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है। डीएफओ के खिलाफ करीब 400 कर्मचारियों ने प्रेमाबाग से कलेक्ट्रेट तक रैली निकालकर प्रदर्शन किया। वन कर्मियों ने मांग की है कि डीएफओ को अगर नहीं हटाया गया तो वे आगे उग्र आंदोलन करेंगे।
बता दें डीएफओ को हटाने की मांग को लेकर कर्मचारी पिछले 11 दिनों से अनिश्चतकालीन हड़ताल पर हैं।
बता दें कोरिया जिले के बैकुंठपुर वन मंडल में जब से युवा आईएफएस मनीष कश्यप ने डीएफओ के रूप में पदभार तब से वो अपनी कार्यशैली को लेकर विवादों में रहे हैं। पत्रकारों को अनपढ़ और अपने ड्राइवर से गाली गलौच करने के मामले में वो पहले से ही सुर्खियों में रहे है। सोनहत रेंज के वाहन चालक को बिना वजह हटाना शामिल है।
बता दें डीएफओ कुछ पत्रकारों को डीएफओ ने अनपढ़ व असभ्य के साथ पैसा वसूली के उद्देश्य से समाचार छापने का आरोप भी लगाया था। इतना ही नही वाहन चालकों को हटाने के खिलाफ जब जून माह में छग वन कर्मचारी संघ कोरिया ने एक बैठक आयोजित तो डीएफओ ने संघ के जिलाध्यक्ष पवन रूपौलिहा को ही सस्पेंड कर दिया था।
डीएफओ की सद्बुद्धी के लिए कर्मियों ने हाल में हवन भी किया था। वन कर्मियों ने भगवना से डीएफओ के लिए सद्बुद्धी की मांग की थी। प्रभारी मंत्री शिव कुमार डहरिया को वन कर्मियों ने इस संबंध में ज्ञापन भी दिया था। जिस पर प्रभारी मंत्री ने कलेक्टर को मामला हैंडल करने का निर्देश दिया गया था।
सतीस कुमार मिश्रा प्रांताध्यक्ष ने बताया कि ऐसे निरंकुश असंवेदनहीन अधिकारी को तत्काल कोरिया वनमण्डल से पृथक कर कर्मचारियों को भयमुक्त करें और ऐसे तानाशाह अधिकारी को तत्काल प्रभाव से हटाकर मुख्यालय में संलग्न किया जावे। छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ का कहना है की मनीष कश्यप ने तीन चार माह पूर्व से ही कार्यभार संभाला है और तब से ही अधिनस्थ कर्मचारियों को परेशान व प्रताड़ित करना प्रारंभ कर दिया है, मिटिंग में सरे आम कहा जाता है कि ये सभी कर्मचारियों का भविष्य बर्बाद कर देंगे और ऐसा कर भी रहे है। अनावश्यक प्रताद्धि करने के उद्देश्य से पचासों कर्मचारियों को नोटिस जारी करना, आचार संहिता अवधि में विधि विरूद्ध ढंग से अनेक कर्मचारियों के स्थानांतरण करना, बार – बार मैदानी कर्मचारियों के मुख्यालय जांच कर परेशान करना, बर्खास्दगी की धमकी देना, दैनिक वेतन भोगी गरीब व्यक्ति कर्मचारी को अकारण ही कार्य से पृथक करना जैसे कृत्यों के साथ ही अधीनस्थों के साथ असंयमित एवं अमर्यादित भाषा (गाली गलौच) का प्रयोग करना इनकी आदत बन गई है।

