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अब घोड़ी पर नहीं बैठ पाएंगे राजनांदगाव के दूल्हे राजा, कारण जान हैरान हो जाएंगे आप ?

राजनन्दगावँ से मनोज चंदेल / दुल्हन को लाने के लिए उसके द्वार तक घोड़े से जाने की सभी दूल्हों की इच्छा होती है, तो वहीं दुल्हन की भी इच्छा होती है कि उनके सपनों का राजकुमार घोड़े पर सवार होकर आए। लेकिन शायद इस सीजन में शादी करने वाले दूल्हों का यह सपना पूरा नहीं हो पाएगा और इसकी वजह है घोड़ों में ग्लैंडर्स का संक्रमण का पाया जाना। संक्रमण पाए जाने के कारण अब राजनांदगाव में घोड़ों का प्रयोग करने पर रोक लगा दी गई है। घोड़ों के इस्तेमाल पर रोक लगाए जाने के कारण अब इनका प्रयोग नहीं किया जा सकेगा।

घोड़ों में अजीब तरीके की हरकत पाए जाने पर पशु चिकित्सकों ने घोड़ों का 1 सैंपल जांच के लिए भेजे थे, जिसके बाद हिसार स्थित राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र (एनआरसीआई) ने सैंपल में ग्लेंडर्स संक्रमण पाए जाने की पुष्टि की है।

डॉ तरुण रामटेके बताते है कि संक्रमण जानलेवा होता है। पशुओं के अलावा इंसानों में भी यह तेजी से फैलता है। इस संक्रमण का कोई उपचार भी नहीं है। यही वजह है कि शासन दवरा घोड़ों के इस्तेमाल पर रोक लगाने की अधिसूचना जारी कर दी है।

यह संक्रमण इंसानों के लिए भी खतरनाक होता है इसलिए घोड़ों के प्रयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया है।



राजनांदगांव मे ग्लेंडर वायर्स की चपेट मे आने से एक और घोडी को पशुधन विभाग की टीम ने नींद की दवा का हेवी डोज देकर मारने की कार्यवाही की है। घोडी को शहर के बाहर नवागांव के पास स्थित ट्रेचिंग ग्राउंड मे दफनाया गया। राजनांदगांव पशुधन विभाग ने शहर के 6 घोडो के जांच के सेम्पल अश्व अनुसंधान केन्द्र भेजे थे जिसमे राजनांदगांव बसंतपुर निवासी सुलतान खान की घोडी रानी पर ग्लेंडर्स वायरस पाजिटिव पाया गया। पशुधन विभाग द्वारा घोडी के मालिक को सूचना देकर घोडी को आवासीय इलाके से दूर रखने कहा गया। इसके बाद पशुधन विभाग द्वारा राज्य शासन को घोडी को मारने के लिये  अनुमति के लिये पत्र लिखा गया था। शासन से अनुमति मिलने के बाद  सोमवार को राजनांदगांव के नवागांव स्थित ट्रेचिंग ग्राउंड मे घोडी रानी को दर्द रहित मौत दी गई। 



 

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