Advertisement Carousel

पार्षद ही चुनेंगे मेयर और अध्यक्ष; CM भूपेश ने बनाई तीन मंत्रियों की कमेटी तो रमन ने कहा – कांग्रेस को हार का डर सता रहा 

बता दे कि अंतिम निर्णय के लिए तीन मंत्रियों के ऊपर जिनमेें रविन्द्र चौबे, मोहम्मद अकबर और शिव डहरिया की उपसमिति की रिपोर्ट के बाद ही हो पाएगा। खबर है कि इस मामले में प्रारंभिक चर्चा हो चुकी है। सीएम भूपेश, महापौर अथवा अध्यक्ष के सीधे निर्वाचन प्रक्रिया को बदलने के संकेत पहले ही दे चुके हैं। अब मंत्रियों की समिति की रिपोर्ट के आधार पर कैबिनेट में इस पर फैसला लिया जाएगा। इसके बाद प्रदेश सरकार 15 तक अध्यादेश लाएगी।

गौरतलब है कि अविभाजित मध्यप्रदेश में 1994 में महापौर-अध्यक्षों का निर्वाचन पार्षदों के जरिए होता था। इसके बाद व्यवस्था बदली और फिर 1999 में महापौर और अध्यक्ष के सीधे चुनाव होने लगे।

कांग्रेस को हार का डर सता रहा है – इस फैसले के द्वारा कांग्रेस सत्ता का दुरुपयोग करेगी। यह जनता के निर्णय को बदलने की साजिश है। कांग्रेस पीछे के दरवाजे से महापौर बनाने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस को पराजय का डर है, इसके बाद भी लड़ाई तो हम लड़ेंगे।

डॉ. रमन सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री

अप्रत्यक्ष तरीके से चुनाव होने पर यदि पार्षदों की संख्या में ज्यादा अंतर हुआ तो आसानी से मेयर या अध्यक्ष चुन लिया जाएगा। लेकिन यदि पार्षदों की संख्या का अंतर कम हुआ तो धनबल और बाहुबल का जोर भी चल सकता है। इससे कथित खरीद-फरोख्त की राजनीति को भी बढ़ावा मिलने की आशंका है।

error: Content is protected !!