00 तहसीलदार पर लगाया दबाव डालने और पैसा मांगने का आरोप
कोरिया जिले में प्रशासनिक आतंकवाद ने भयावह रूप ले लिया है, बड़े राजनेताओं के संरक्षण में अधिकारी अपनी मनमर्जी पर उतारू हैं साथ ही मातहत कर्मचारियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित भी कर रहे हैं।
एक ताजा मामले मे बैकुंठपुर तहसीलदार ऋचा सिंह ने मामूली बात पर अपने मातहत पटवारी पर सारे हदो को पार करते हुए कोतवाली में गैर जमानती धाराओं के तहत अपराध दर्ज करा दिया जिससे बौखलाए पटवारी संघ ने तहसीलदार की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी जाहिर की और कलेक्टर को ज्ञापन सौपकर काम बंद करने और तहसीलदार को हटाने की मांग की है।
उल्लेखनीय है कि बैकुंठपुर तहसीलदार द्वारा पिछले दिनों पटवारी शिल्पी गुप्ता से मामूली बातचीत को लेकर अनर्गल आरोप लगाते हुए कोतवाली में धारा 186,353 के तहत मामला दर्ज करा दिया था, मामला प्रकाश में आने के बाद सुलह की काफी कोशिश की गई लेकिन बात नही बनने पर पटवारी संघ ने अब तहसीलदार के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया है।
पटवारी संघ ने शुक्रवार को कलेक्टर को ज्ञापन सौपकर कहा है कि पटवारी शिल्पी गुप्ता और तहसीलदार के बीच हुए विभागीय कार्य को लेकर आपसी बातचीत के उपरांत दुर्भावना से ग्रस्त होकर महिला पटवारी शिल्पी गुप्ता के खिलाफ गैर जमानती धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है जो कि सिविल सेवा आचरण संहिता के सर्वथा खिलाफ है। कार्यालयीन कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्य को लेकर उच्च अधिकारी द्वारा प्राथमिकी दर्ज कराने से हम सभी पटवारी मानसिक रूप से तनावग्रस्त हैं तथा भय के इस वातावरण में हम समस्त पटवारी वर्तमान तहसीलदार के अधीनस्थ कार्य करने में सर्वथा असमर्थ हैं।
ज्ञापन मे कहा गया है कि तहसीलदार के द्वारा अनावश्यक रूप से विशेष तौर पर महिला पटवारियों के साथ दुर्भावनापूर्वक व्यवहार किया जाता है,कार्यों को लेकर उलाहना दी जाती है और बातचीत में अमर्यादित शब्दो का प्रयोग किया जाता है। नामांतरण, बंटवारा, फौती जैसे अविवादित प्रकरणों को विशेष मंशा के तहत दबाव देकर न्यायालय में दर्ज करवाया जाता है, प्रत्येक नामांतरण के पीछे अनावश्यक रूप से पैसों की मांग की जाती है मांग पूरी न करने की नामांतरण को लटकाया जाता है। तहसीलदार स्वयं के द्वारा पारित नामांतरण पर किसान पुस्तिका नही बनाती हैं पटवारी जब तैयार किसान पुस्तिका तहसीलदार के पास हस्ताक्षर हेतु लेकर जाता है तो उसे दिन भर मुजरिम की तरह न्यायालय में खड़ा रखा जाता है और फिर यह कहकर वापस कर दिया जाता है कि कल आना आज नही हो पायेगा, इस प्रकार एक कार्य के लिए कई दिन तहसीलदार के चक्कर काटना पड़ता है।
ज्ञापन में कहा गया है कि मवेशियों के चारा पानी के लिए प्रतिमाह 3000 रुपये चंदे के रूप में लिया जाता है, पैसे का क्या उपयोग किया जा रहा है इसकी जानकारी हमे नही है। सर्विस बुक, इंक्रीमेंट आदि कार्यों को बेवजह जानबूझकर विशेष मांग और मंशा के तहत लटकाया जाता है। 20-25 वर्ष की सेवा कर चुके वरिष्ठ पटवारियों से अमर्यादित शब्दों के साथ व्यवहार किया जाता है जो कि खेदजनक है। तहसीलदार बैकुंठपुर की कार्यप्रणाली एक न्यायिक अधिकारी के तौर पर उचित नही है इस तरह के भय के वातावरण में हम समस्त पटवारियो का तहसीलदार के अधीनस्थ रहकर कार्य करना संभव नही है।
ज्ञापन में मांग किया गया है कि पटवारी के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी वापस लिया जाए और तहसीलदार को अन्यत्र स्थानांतरित किया जाए समस्या का उचित और संतोषजनक समाधन न होने की स्थिति में पटवारियों द्वारा कल(शनिवार) से आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
