00 बिलासपुर के कानन पेंडारी जु का मामला
00 जिम्मेदार अधिकारियों का गोलमोल जवाब
00 मेटिंग सीजन में मौत स्वभाविक-डी.एफ.ओ.
बिलासपुर / छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में कानन पेंडारी जू में मौत का सिलसिला जारी है। पहले 22 चीतल, फिर एक सफेद शेर, एक दरियाई घोड़े, एक शुतुरमुर्ग की बेवक्त मौत हो चुकी है और अब दो चीतलो की मौत का नया मामला सामने आया है। इन सबके बावजूद विभागीय अधिकारियों के बेतुके बयानबाजी से मामला और गंभीर होता जा रहा है।
बिलासपुर के डीएफओ सत्यदेव शर्मा की मानें तो चीतलों की मौत स्वभाविक है। क्योंकि मेटिंग सीजन में ऐसा होता रहता है। दो चीतल आपस में मादा के लिए लड़ते हैं और लड़ते हुए मर जाते हैं। इसमें भला ज़ू प्रबंधन क्या कर सकता है ? यही कारण है कि इस तरह के मामलों को प्रबंधन ज्यादा गंभीरता से नहीं लेता।
पिछले दिनों हुए तमाम मौतों का जिक्र किया जाए तो यह साफ हो जाता है कि, किस तरह से जू प्रबंधन की भारी लापरवाही और अनदेखी की कीमत बेजुबान जानवरों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है। उदाहरण के लिए शुतुरमुर्ग की हाल ही में हुई मौत के बाद से अब तक कोई जांच समिति नहीं बनी है। पीएम रिपोर्ट भी महज़ खानापूर्ति के लिए होता है । पिछली बार सफेद शेर की मौत सांप के काटने से होना बताया जा रहा था। जबकि पीएम रिपोर्ट इससे इत्तेफाक नहीं रखती। इतना ही नहीं इस मामले में तो दो अलग-अलग पीएम रिपोर्ट भी आए थे। खुद विभागीय मंत्री मोहम्मद अकबर ने भी इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया था। इसके बावजूद भी बिलासपुर के कानन पेंडारी जू में मौतों का सिलसिला बदस्तूर जारी है। जू प्रबंधन को किसी भी कार्रवाई का डर नहीं है क्योंकि, विभाग के आला अधिकारी ही इस तरह के मामलों को गंभीरता से नहीं लेते हैं दूसरी तरफ दोषी और जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारियों को बचाने की पूरी कोशिश की जाती है। बेज़ुबान जानवरों की मौत से भला इन सरकारी अफसरों और कर्मचारियों को क्या सरोकार ?
ये अलग बात है कि, हाल ही में जू को डिवेलप करने और इसे और आकर्षित और सुंदर बनाने के लिए करोड़ों रुपए के प्रोजेक्ट बनाए गए हैं । जिसे दिल्ली भेजा गया है विभाग के अधिकारी इस बात का जिक्र करने से परहेज नहीं करते कि किस तरह से पैसों की कमी के कारण जानवरों की देख-रेख और जो प्रबंधन में परेशानियां आ रही हैं ।
फिलहाल बिलासपुर के कानन पेंडारी ज़ू में बेजुबान जानवरों की जान खतरे में है। अगर समय रहते इस पर ध्यान नही दिया गया तो न जाने और कितने बेजुबान जानवरों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ेगा।
