मार्च 2015 में केजरीवाल सरकार ने इन विधायकों को संसदीय सचिव बनाया था। इसे लाभ का पद बताते हुए याचिका दायर की गई थी। प्रशांत पटेल नामक शख्स ने राष्ट्रपति को याचिका भेजकर इनकी सदस्यता खत्म करने की मांग की थी। राष्ट्रपति ने चुनाव आयोग के पास मामला भेजा जहां से मार्च 2016 में इन विधायकों को नोटिस जारी किया गया था। पार्टी ने इसके खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
बहरहाल, लंबी लड़ाई के बाद आखिरकार आम आदमी पार्टी को राहत मिल गई। अगले साल जनवरी में अरविंद केजरीवाल सरकार का कार्यकाल समाप्त हो रहा है और विधानसभा चुनाव में से पहले सरकार के लिए यह राहत की बड़ी बात है।
