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सड़क पर निकल पड़े प्रवासी मजदूरों की स्थिति दयनीय व त्रासदीपूर्ण : झा

00 पैकेज के नाम पर केंद्र ने इन्हें झुनझुना पकड़ा दिया
00 प्रवासी मजदूरों का निकलना देश की अर्थव्यवस्था के लिए घातक

भिलाई / कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के. के. झा ने देश के वर्तमान हालात पर चिंता जताते हुए कहा है कि प्रवासी मजदूरों की जो दुर्दशा टीवी और समाचार पत्रों में दिख रही है वह कम है।

यदि हम सड़क पर खड़े होकर हकीकत देखें तो इन मजदूरों की स्थिति मर्माहत कर देती है। खासकर यूपी, बिहार के मजदूर जो अपने परिवार सहित भूखे प्यासे सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा कर अपने घर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, उनकी स्थिति बेहद त्रासदीपूर्ण है। सड़क दुर्घटनाओं में अभी तक सैकड़ों मजदूरों की जान जा चुकी है इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा ? इन प्रवासी मजदूरों को आर्थिक मदद देने की बजाय पैकेज के नाम पर एक बार फिर केंद्र सरकार ने झुनझुना पकड़ा दिया है।

श्री झा ने केंद्र सरकार द्वारा इन प्रवासी मजदूरों के लिए की गई व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा है कि यदि प्रारंभ में ही लॉकडाउन के पहले रणनीति बना ली गई होती और इन प्रवासी मजदूरों को अपने घर तक पहुंचने का समय दिया गया होता तो आज देश की यह स्थिति नहीं होती। बिना सोचे समझे ट्रेन और ट्रांसपोर्ट के साधन बंद कर दिए गए, जिसके कारण आज स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई है।
कांग्रेस नेता श्री झा ने छत्तीसगढ़ प्रदेश शासन के मुखिया भूपेश बघेल की प्रशंसा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने स्वयं एवं अपनी टीम को जिस तरह लोगों की मदद के लिए सड़कों पर ला खड़ा किया, उसी का नतीजा है कि आज इस प्रदेश में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या न्यूनतम है। वही एक भी व्यक्ति की मौत अभी तक नहीं हुई है। भिलाई के महापौर और विधायक सहित उनकी टीम की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि ये लोग रात दिन मजदूरों की सेवा में लगे हैं। अपने राज्य से होकर गुजरने वाले सभी मजदूरों को वे हरसंभव मदद कर रहे हैं।

श्री झा ने राहुल गांधी द्वारा आज मीडिया से बातचीत के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि हमारे नेता ने स्पष्ट कहा है कि मजदूरों को अभी पैकेज के नाम पर बरगलाया जा रहा है जबकि उन्हें अभी नगदी की जरूरत है। राहुल गांधी ने साफ कहा कि इस समय केंद्र सरकार सिर्फ वाहवाही लूटने का काम कर रही है। उसके द्वारा घोषित राहत पैकेज का 1 रू. भी अभी तक इन प्रवासी मजदूरों तक नहीं पहुंचा है।

श्री झा ने यूपी एवं बिहार के प्रवासी मजदूरों का जिक्र करते हुए कहा कि आज देश के महानगरों से इनका पलायन हो रहा है जिसके कारण आने वाले समय में पूरे देश की अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी। प्रवासी मजदूरों के सड़क पर निकल जाने के कारण पूरे देश की फैक्ट्री में मजदूरों की कमी हो गई है। किसी भी काम के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। सब्जी उत्पादन से लेकर बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन जैसे सैकड़ों जगहों पर जहां इन मजदूरों से काम लिया जाता था आज वहां सब कुछ ठप्प है।

श्री झा ने कहा कि कल तक बिहार और यूपी के मजदूरों को बला कहा जाता था। उनका मजाक उड़ाया जाता था। बिहारी बोलकर उन्हें अपमानित किया जाता था। अब जब यह मजदूर अपने घरों की ओर निकल गए हैं तो कई राज्य शासन इन्हें रोकने की बात कह रहे हैं। यह राज्य शासन यदि पहले ही इन मजदूरों का महत्व समझ गए होते तो यह दुर्गति ना होती। श्री झा ने कहा कि यूपी बिहार के जो मजदूर आज अपने गांव की तरफ कष्ट झेलते हुए जा रहे हैं अब उनसे उम्मीद नहीं की जानी चाहिए कि वह आने वाले एक-दो वर्षों में फिर वापस आएंगे। यह मजदूर पूरे देश के विकास का पहिया थे। अब यह पहिया थम गया है। इसके दुष्परिणाम देश के सामने जल्द आएंगे।

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