रायपुर / भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा है कि देश में सत्तारूढ़ नरेंद्र मोदी सरकार खेती-किसानी से जुड़े लोगों का हित चाहती है, इसलिए उसने इससे जुड़े जड़वत कानूनों को बदलने की हिम्मत दिखाई है। हालांकि, उसके इन युगान्तकारी प्रयासों से पास हुए कृषि व किसानों से जुड़े दो बिलों को लेकर कतिपय किसान संगठनों के द्वारा जहां-तहां बवाल मचाया जा रहा है, जिसके विरोध की गूंज संसद से सड़क तक सुनाई दे रही है। इससे किसानों व कृषि उत्पाद कारोबारियों के गुमराह होने का अंदेशा भी बढ़ गया है। उन्होंने एक स्वर में कहा कि देश के किसानों के लिएफिर भी सुकून की बात यह है कि दोनों बिल संसद के दोनों सदनों यानी निम्न सदन लोकसभा व उच्च सदन राज्य सभा में पास हो चुके हैं और राष्ट्रपति द्वारा इन बिलों पर हस्ताक्षर करने के बाद से ये कानून का रूप भी ले चुका हैं। इसलिए अब इस बात की उम्मीद बढ़ी है कि तमाम विरोधों के बावजूद सरकार खेती-किसानी के हित में लाभदायक फैसले लेने में सफल रही है और इसके लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं सरकार के सभी मंत्री बधाई की पात्र है। आपको बता दें कि राज्य सरकारों द्वारा संचालित 2,500 एमएसपी मंडियां हैं, जहां पहले 67 प्रतिशत तक कृषि उपज की खरीद होती थी। वहीं, सरकारी खरीद में पंजाब और हरियाणा का हिस्सा लगभग 90 प्रतिशत है। यही वजह है कि कृषि और किसानों से जुड़े दो बिलों को लेकर किसानों के विरोध की जो गूंज सुनाई दे रही है, उसके मद्देनजर आपके लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि आखिरकार इन बिलों में क्या है और इसके क्या लाभ बताए जा रहे हैं? वहीं, इनको लेकर जो आशंकाएं जताई जा रही हैं, वह कितनी निर्मूल हैं, उस पर भी एक नजर डालना दिलचस्प है।सबसे पहले यह जानते हैं कि वो दो बिल कौन कौन से हैं- पहला, कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सुविधा) विधेयक-2020. और दूसरा कृषक सशक्तिकरण एवं संरक्षण कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020. बताते चलें कि कृषि से जुड़े इन दो बिलों के अलावा आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक, 2020 के निर्धारित प्रावधानों को लेकर भी किसानों की ओर से ऐतराज जताया जा रहा है, जिसमें कोई दम नहीं है। सरकार ने इससे जुड़े एक एक पहलू को स्पष्ट करने की कोशिश की है जिले के नेताओं ने किसी दिन से संबंधित फायदे को क्रमवार गिनाया जिसमें
पहला, जहां तक कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सुविधा) विधेयक-2020 का सवाल है तो ये राज्य-सरकारों की ओर से संचालित एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केट कमेटी (एपीएमसी) मंडियों के बाहर (बाजारों या डीम्ड बाजारों के भौतिक परिसर के बाहर) फार्म मंडियों के निर्माण के बारे में है। क्योंकि भारत में 2,500 एपीएमसी मंडियां हैं जो राज्य सरकारों द्वारा संचालित हैं। वहीं, दूसरा बिल कृषक (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020) कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग या अनुबंध खेती के बारे में है। जबतक हमलोग इससे जुड़े एक एक पहलू को नहीं समझ लेंगे, तबतक किसानों को समझाना किसी के बूते की बात नहीं होगीइसलिए, हम यहां पर आपको नए बिलों के कतिपय लाभ के बारे में बता रहे हैं-पहला, राज्यों की कृषि उत्पादन विपनण समिति यानि एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केट कमेटी (एपीएमसी) के अधिकार बरकरार रहेंगे। इसलिए किसानों के पास सरकारी एजेंसियों का विकल्प खुला रहेगा।दूसरा, नए बिल किसानों को इंटरस्टेट ट्रेड (अंतरराज्यीय व्यापार) को प्रोत्साहित करते हैं, ताकि किसान अपने उत्पादों को दूसरे राज्य में स्वतंत्र रूप से बेच सकेंगे।तीसरा, वर्तमान में एपीएमसीज की ओर से विभिन्न वस्तुओं पर 1 प्रतिशत से 10 फीसदी तक बाजार शुल्क लगता है, लेकिन अब राज्य के बाजारों के बाहर व्यापार पर कोई राज्य या केंद्रीय कर नहीं लगाया जाएगा।चतुर्थ, किसी एपीएमसी टैक्स या कोई लेवी और शुल्क आदि का भुगतान नहीं होगा। इसलिए और कोई दस्तावेज की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। वहीं, खरीदार और विक्रेता दोनों को लाभ मिलेगा। निजी कंपनियों और व्यापारियों की ओर से एपीएमसी टैक्स का भुगतान होगा, किसानों की ओर से नहीं।पंचम, किसान कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग या अनुबंध खेती के लिए प्राइवेट प्लेयर्स या एजेंसियों के साथ भी साझेदारी कर सकते हैं। छठा, कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग निजी एजेंसियों को उत्पाद खरीदने की अनुमति देगी- कॉन्ट्रेक्ट केवल उत्पाद के लिए होगा। किसी भी निजी एजेंसियों को किसानों की भूमि के साथ कुछ भी करने की अनुमति नहीं होगी और न ही कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग अध्यादेश के तहत किसान की जमीन पर किसी भी प्रकार का निर्माण होगा।सातवां, वर्तमान में किसान सरकार की ओर से निर्धारित दरों पर निर्भर हैं। लेकिन नए आदेश में किसान बड़े व्यापारियों और निर्यातकों के साथ जुड़ पाएंगे, जो खेती को लाभदायक बनाएंगे।आठवां, प्रत्येक राज्य में कृषि और खरीद के लिए अलग-अलग कानून हैं। लिहाजा, नए कानून के तहत लागू एक समान केंद्रीय कानून सभी हितधारकों (स्टेकहोल्डर्स) के लिए समानता का अवसर उपलब्ध कराएगा। नवम, नए बिल कृषि क्षेत्र में अधिक निवेश को प्रोत्साहित करेंगे, क्योंकि इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। निजी निवेश खेती के बुनियादी ढांचे को और मजबूत करेगा और रोजगार के अवसर पैदा करेगा। भारतीय जनता पार्टी के तीनों नेताओं ने कहा कि अवसरवादी ताकतें और नेता किसानों के साथ छल एवं उन्हें बरगलाने की कोशिश कर रहे हैं जहां जहां पर कांग्रेस की सरकारें हैं वहां वहां पर 8 दिसंबर को भारत बंद के दौरान सरकार बंद को सफल बनाने में जुटी हुई है किसानों को इन बिल के बारीकियों के बारे में समझना चाहिए और भारत बंद के आह्वान को असफल कर इस देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी एवं उनकी टीम को इस महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए आभार व्यक्त करते हुए भारत के किसानों को बिल के समर्थन में खड़ा होने के लिए अपील की हैं।
कृषि-किसान बिल के लाभ को समझिए, तमाम आशंकाएं हैं निर्मूल ? श्याम बिहारी जायसवाल
