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संसदीय सचिव चिंतामणि महराज ने डॉ.एस.के.गुप्ता को किया सम्मानित

कोरिया / डायबिटिक की मरीज महिला को 13 दिनों बाद कोमा से वापस लाने के लिए जिला चिकित्सालय के चिकित्सक डॉ.एस.के.गुप्ता को संसदीय सचिव चिंतामणि महराज, संसदीय सचिव अम्बिका सिंह देव ,मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ रामेश्वर शर्मा के उपस्थिति में सम्मानित किया गया।

इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग से डॉ सेंगर, डॉ भास्कर, डॉ चौहान, डॉ ए.के. सिंह एवं संगठन से जिला अध्यक्ष नज़ीर अज़हर आशीष डबरे, रामकृष्ण साहू राजीव गुप्ता, अर्पित गुप्ता, साज़िद दिलबन्धु एवं अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

ज्ञात हो कि जिला अस्पताल बैकुंठपुर को डायबिटीज टाइप-वन (Diabetes Type-One) से पीडि़त और आईसीयू में 12 दिन से कोमा (Coma) में रहने वाली युवती की जान बचाने में बड़ी कामयाबी मिली थी, डॉक्टरों के अनुसार संभवत: कोरिया सहित प्रदेश का पहला मामला था, जिसमें डायबिटीज टाइप-वन से पीड़ित और कोमा में रहने वाले मरीज की जान बचाई गई है।

जिले के ग्राम पंचायत खडग़वां निवासी पूनम शेषर पिता गणेश राम शेषर (22) की करीब एक साल से तबीयत खराब थी। उसका शरीर दिन-ब-दिन दुबला-पतला हो रहा था। परिवार वाले करीब 2 महीने पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खडग़वां में इलाज कराने ले गए थे। इस दौरान जांच में डायबिटीज निकला था और युवती का इलाज चल रहा था।
करीब 10 दिन भर्ती कर इलाज करते समय अचानक डायबिटीज (Diabetes) केटोएसिडोसिस अटैक आया और युवती कोमा में चली गई थी। 25 नवंबर को खडग़वां से जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। पीडि़ता जिला अस्पताल में भर्ती होने से पहले कोमा में चली गई थी। इस दौरान अस्पताल के डॉक्टर्स, परिजन युवती के बचने की उम्मीद छोड़ चुके थे।

साथ ही पीडि़ता को हायर सेंटर (Higher Center) ले जाने की सलाह दी गई थी। हायर सेंटर नहीं ले जाने के कारण सिविल सर्जन डॉ. एसके गुप्ता स्वयं इलाज करने की जिम्मेदारी ली। अस्पताल में डॉक्टर्स व आईसीयू मेडिकल स्टाफ इलाज में जुटी और लगातार इंसुलिन सहित अन्य दवाई का डोज दिया गया। अस्पताल में पीडि़ता को 11 दिन बाद 6 दिसंबर को होश आया और उसने आंखें खोली। वहीं युवती 12 दिन बाद 7 दिसंबर बोलना शुरू कर दी।
फिलहाल पीडि़ता आईसीयू (ICU) में भर्ती हैं और डॉक्टर्स की टीम लगातार मॉनीटरिंग कर रही थी, मेडिकल टीम में डॉ. इमरान खान, नर्सिंग स्टाफ सविना टोप्पो, स्वांजलि, लकड़ा, सरस्वती पैकरा व हमिया खलखो शामिल रहे ।

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