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बिलासपुर के 72 कोल डिपो पर छापा

बिलासपुर / जिले में संचालित 72 कोल डिपो में राज्य की टीम छापामार कार्रवाई कर रही है। 7 डिपो खुली जगह में चलते मिले। यहां भारी मात्रा में कोयला डंप था। जांच में पता चला कि किसी भी डिपो में नियम का पालन नहीं हो रहा है। आसपास पर्यावरण प्रदूषण का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। पर्यावरण विभाग में समय पर एनओसी भी जमा नहीं किया गया है। टीम ने सभी कोल डीपो संचालकों को नोटिस जारी किया है।

राज्य सरकार के आदेश पर चार जिलों में राज्य की टीम और खनिज विभाग के स्थानीय अधिकारी कोल डिपो पर छापामार कार्रवाई कर रहे हैं। बिलासपुर जिले में तीन दिनों से टीम अलग-अलग क्षेत्रों में संचालित कोल डिपो में दबिश दे रही है। इस दौरान पता चला कि रतनपुर और रायपुर रोड में संचालित डिपो में कोरबा की खदानों से कोयला सप्लाई हो रहा है। कोयला में गिट्टी व बजरी मिलाई जा रही है। रतनपुर, रायपुर, हिर्री, सकरी बाइपास में कोल डिपो संचालित हैं। कई कोल डिपो में कोयले का कोई हिसाब नहीं मिला। डिपो में भारी मात्र में बजरी गिट्टी रखी हुई थी। संचालकों से पूछने पर कोई जवाब नहीं मिला।

रतनपुर क्षेत्र के डिपो में भारी मात्रा में कोयला डंप

राज्य सरकार की टीम रतनपुर क्षेत्र में संचालित डिपो पहुंची। तब यहां भारी मात्रा में कोयला डंप मिला। डिपो के चारों तरफ बड़ी-बड़ी दीवार बनाई गई है। ताकी बाहर से अंदर की गतिविधियां नजर न आएं। डिपो के आसपास धूल के गुब्बारे उड़ रहे थे। टीम ने स्थानीय लोगों से भी पूछताछ की। तब लोगों ने बताया कि डिपो संचालक सड़क पर पानी का छिंड़काव तक नहीं करवाते हैं। डस्ट के कारण लोग बीमार पड़ रहे हैं।

लोखंडी क्षेत्र के डिपो में कोयले का हिसाब नहीं मिला

कोनी क्षेत्र के लोखंडी व अन्य इलाके में कोल डिपो में भी जांच करने टीम पहुंची। यहां भी भारी मात्रा में कोयला डंप था। टीम के अधिकारियों ने हिसाब पूछा, लेकिन संचालक डंप कोयले को लेकर कोई हिसाब नहीं दे पाया। यहां तक कि दस्तावेज भी दुस्र्स्त नहीं थे। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए पेड़-पौधे तक नहीं लगाए गए थे।

लाइसेंस किसी का, काम कोई और कर रहा

कोल डिपो संचालकों ने जगह की कमी के कारण अन्य जगहों पर कोयला डंप रखा है। इसके लिए खनिज विभाग से लाइसेंस बनवाकर आदेश लेते हैं। जांच में सामने आया कि लाइसेंस किसी और के नाम पर पंजीकृत है, यहां काम दूसरा व्यक्ति द्वारा कराया जा रहा है। संचालक अपने रिश्तेदार व परिचित लोगों से संचालन करवा रहे हैं। उद्योग से नाम से खदान से एक नंबर कोयला सप्लाई होता है, लेकिन डिपो में आकर बजरी गिट्टी मिलाई जा रही है। टीम को डिपो में दोनों प्रकार के कोयले मिला है।

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