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चार हार्डकोर नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, ताड़मेटला हमले और अन्य बड़ी घटनाओं में थे शामिल

नारायणपुर।छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में पुलिस और राज्य सरकार की पुनर्वास योजनाओं का असर अब दिखने लगा है। क्षेत्र में बढ़ते पुलिस दबाव और छत्तीसगढ़ सरकार की नियाद नेल्लानार योजना से प्रभावित होकर चार हार्डकोर नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया है। इन नक्सलियों का नाम प्रदेश में हुई बड़ी हिंसात्मक घटनाओं से जुड़ा है। इस आत्मसमर्पण ने माओवादी संगठन ईस्ट बस्तर डिवीजन को एक और बड़ा झटका दिया है।

आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली और उनके अपराध
सरेंडर करने वाले चार नक्सली, जिन पर 8-8 लाख रुपये का इनाम घोषित था, निम्नलिखित हैं:

  1. अरब उर्फ कमलेश उर्फ गांधी – डिवीसीएम सदस्य, ताड़मेटला हमले में शामिल, जिसमें 76 जवान शहीद हुए थे।
  2. हेमलाल – आमदाई एरिया कमेटी सचिव, बुकिंतोर आईईडी ब्लास्ट का मास्टरमाइंड, जिसमें 5 जवान शहीद हुए।
  3. अर्जुन उर्फ रंजीत – ईरपानार एंबुश में शामिल, जिसमें 5 जवान मारे गए थे।
  4. कोसी उर्फ काजल – महिला नक्सली, कंपनी नंबर 06 और प्लाटून नंबर 02 की सक्रिय सदस्य।

सरकार और पुलिस की रणनीति का असर
पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार ने आत्मसमर्पण के दौरान बताया कि नक्सलियों को मुख्यधारा में जोड़ने के लिए राज्य सरकार द्वारा लागू नियाद नेल्लानार योजना बेहद प्रभावी साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि माओवादियों को आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित करने के लिए प्रत्येक पुलिस कैम्प के पास झोपड़ी नुमा “घोटुल” बनाए जा रहे हैं। इन घोटुलों का उद्देश्य नक्सलियों को बिना किसी डर के आत्मसमर्पण करने का अवसर प्रदान करना है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जो भी नक्सली मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उन्हें पेड़ की टहनी लेकर पुलिस कैंप या थाना परिसर के सामने खड़ा होना होगा। ऐसा करते ही उन्हें बिना किसी नुकसान के आत्मसमर्पण की प्रक्रिया के तहत शामिल किया जाएगा।

अरब ने किया मुख्यधारा में लौटने का आह्वान
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली अरब ने मीडिया से बातचीत के दौरान अपने नक्सली संगठन छोड़ने के कारण बताए। उसने कहा कि नक्सली आंदोलन अब हिंसा और व्यक्तिगत स्वार्थों में बदल चुका है। उसने अपने साथी नक्सलियों से अपील की कि वे भी हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौट आएं और शांति व विकास की राह पर चलें।

पुनर्वास और समाज में वापसी
पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को छत्तीसगढ़ सरकार की सरेंडर नीति के तहत पुनर्वास का लाभ मिलेगा। उन्हें समाज में सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर प्रदान किया जाएगा।

क्षेत्र में शांति स्थापना की दिशा में एक और कदम
नारायणपुर जिले में यह आत्मसमर्पण राज्य सरकार और पुलिस की बड़ी सफलता मानी जा रही है। यह घटना यह भी दर्शाती है कि लगातार बढ़ते पुलिस दबाव और प्रभावी योजनाओं के कारण नक्सली संगठन कमजोर पड़ रहा है।

पुलिस अधीक्षक ने कहा, “हमारा उद्देश्य न केवल नक्सलियों का आत्मसमर्पण सुनिश्चित करना है, बल्कि यह भी है कि क्षेत्र में स्थाई शांति कायम हो। इसके लिए राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”

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