रायपुर। भारतमाला परियोजना के तहत प्रदेश में भूमि अधिग्रहण और मुआवजे के मुद्दे पर सोमवार को विधानसभा में जोरदार बहस हुई। नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने रायपुर, बिलासपुर और कोरबा में अधिग्रहित निजी, शासकीय और वन भूमि का तहसीलवार ब्यौरा मांगते हुए कई गंभीर सवाल उठाए।
उन्होंने पूछा कि भूमि अधिग्रहण के लिए किस आधार पर मुआवजे की दर तय की गई, अब तक कितने किसानों और भूमिस्वामियों को मुआवजा दिया गया और कितने का भुगतान लंबित है? साथ ही, पेड़ों की कटाई के बदले मुआवजे की क्या व्यवस्था की गई, इस पर भी सरकार से जवाब मांगा।
रातोंरात 2 करोड़ के भुगतान पर उठे सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि एक ट्रस्ट को रातोंरात 2 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया, जबकि आम जनता और किसानों को उनका हक अब तक नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि 28 दिन पहले इस संबंध में सवाल लगाया गया था, लेकिन सरकार अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पाई है।
मंत्री का जवाब—जानकारी जुटाई जा रही
मामले पर जवाब देते हुए राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि सभी संबंधित जानकारियां एकत्र की जा रही हैं और जल्द ही विधानसभा में प्रस्तुत की जाएंगी।
विधानसभा अध्यक्ष का निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने निर्देश दिया कि अगले प्रश्नोत्तर सत्र में इस मुद्दे को पहली प्राथमिकता के रूप में लिया जाएगा।
पूर्व सीएम ने दुर्ग का मामला उठाया
पूर्व मुख्यमंत्री ने भी बहस में हिस्सा लेते हुए कहा कि दुर्ग जिले में भी भारतमाला परियोजना से जुड़ी अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं।
यह मुद्दा सरकार के भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना यह होगा कि सरकार विपक्ष के इन सवालों का जवाब कब और कैसे देती है।