रायपुर। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSC) द्वारा की गई रिएजेंट खरीदी का मामला विधानसभा में जोरशोर से उठा। विपक्ष के सवालों के बीच स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने स्वीकार किया कि इस खरीद में भारी अनियमितताएं पाई गई हैं।
बजट से अधिक खरीदी, आठ से दस गुना ज्यादा दर
स्वास्थ्य मंत्री ने जानकारी दी कि मोक्षित कॉर्पोरेशन से कुल 385 करोड़ रुपये की खरीदी की गई, जबकि उपलब्ध बजट और मांग के हिसाब से यह खरीदी अनावश्यक थी। उन्होंने यह भी बताया कि सामान की दरें बाजार मूल्य से आठ से दस गुना अधिक रखी गईं।
15 अधिकारी घोटाले में लिप्त, सप्लायर जेल में
विभागीय जांच में खुलासा हुआ कि इस घोटाले में 15 अधिकारी शामिल थे, जिनमें दो बड़े अधिकारियों की भी संलिप्तता पाई गई। जांच करने वाले ही भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गए। मामले में कार्रवाई करते हुए ईओडब्ल्यू (EOW) को जांच सौंपी गई, जिसने एक सप्लायर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
338 करोड़ का भुगतान रोका, NOC जारी
सरकार ने मोक्षित कॉर्पोरेशन को किए जाने वाले 338 करोड़ रुपये के भुगतान पर रोक लगा दी है। साथ ही सभी दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए आवश्यक स्वीकृति (NOC) जारी कर दी गई है।
अजय चंद्राकर और स्वास्थ्य मंत्री में तीखी बहस
विधानसभा प्रश्नकाल के दौरान पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर और स्वास्थ्य मंत्री के बीच इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस हुई। विपक्ष ने इसे “बड़े रैकेट” का हिस्सा बताया और मामले की गहन जांच की मांग की।
खरीदी में मिली ये गड़बड़ियां
- 700 मशीनें अब तक चालू नहीं हुईं।
- क्लोज सिस्टम की जगह ओपन सिस्टम की मशीनें सप्लाई की गईं।
- तीन तरह की अनियमितताएं पाई गईं।
इस घोटाले से जुड़े अधिकारियों और कंपनियों पर अब क्या कार्रवाई होगी, यह देखने योग्य होगा। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
