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बूढ़ा तालाब में छोड़े जाएंगे 500 मगरमच्छ! प्रशासन ने बताई वजह

रायपुर ( होस ) अगर आपको लगता है कि होली सिर्फ रंगों, गुलाल और भांग तक सीमित है, तो जनाब, ज़रा ठहरिए! इस बार रायपुर के बूढ़ा तालाब में होली कुछ ज्यादा ही रोमांचक होने वाली है। खबर है कि प्रशासन ने तालाब में 500 मगरमच्छ छोड़ने का फैसला किया है! जैसे ही यह खबर फैली, इलाके में अफरा-तफरी मच गई। लोग अब तक यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि पिचकारी लेकर जाएं या जान बचाकर दौड़ने की प्रैक्टिस शुरू करें।

क्या है पूरा मामला?

पिछले साल होली के दौरान बूढ़ा तालाब का पानी रंगों और गुलाल से इतना बदल गया कि मछलियों को लगा कि वे ‘मंगल ग्रह’ पर शिफ्ट’ हो गई हैं। पानी सूखने की कगार पर पहुंच गया और तालाब की हालत वोटिंग मशीन से भी ज्यादा खराब हो गई। इस बार नगर निगम ने इसे रोकने के लिए एक नायाब प्लान बनाया—मगरमच्छ छोड़ने का!

लोगों की दिलचस्प प्रतिक्रियाएं

गांव के खोमन चाचा बोले, “अरे भई, अब रंग लगाने जाएंगे कि मगरमच्छ से बचने के लिए दौड़ेंगे?”
वहीं, अनन्त पंडित ने सुझाव दिया, “अगर मगरमच्छों को भी रंग-गुलाल लगाकर छोड़ दिया जाए, तो होली सच में ऐतिहासिक बन जाएगी!”
चुन्नी यादव, जो हर साल अपनी प्रेमिका के पीछे पिचकारी लेकर दौड़ता है, ने चिंता जताई—”अबकी बार प्रेमिका नहीं, मगरमच्छ पीछे दौड़ पड़े तो? प्यार तो दूर, जान बचानी मुश्किल हो जाएगी!”

प्रशासन ने दी सफाई (और हंसी भी)

जब प्रशासन से इस बारे में पूछा गया तो अधिकारी पहले हंसे, फिर बोले—”अरे भाई, ये बस अफवाह है! मगरमच्छ तो नहीं आ रहे, लेकिन तालाब की सफाई और सुरक्षा के लिए खास इंतजाम किए जाएंगे।”
मतलब, मगरमच्छ तो नहीं होंगे, लेकिन जुबानी मगरमच्छी आंसू जरूर बहाए जाएंगे!

तो अब क्या करें?

देखिए भइया, अगर आपने मगरमच्छों से बचने के लिए दौड़ने की तैयारी शुरू कर दी थी, तो अब स्पीड कम कर सकते हैं। हां, लेकिन अगर तालाब को बचाना है, तो रंगों का कम इस्तेमाल करें। और सबसे जरूरी बात—होली मनाइए पूरे जोश में, लेकिन होश में!

तो दोस्तों, होली में मगरमच्छ नहीं आएंगे, लेकिन रंगों की बौछार से बचना फिर भी मुश्किल होगा! तैयार रहिए, रंग लगने से बचने का कोई ऑप्शन नहीं है!

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