रायपुर, 15 जुलाई
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन सदन की कार्यवाही हंगामेदार रही। प्रश्नकाल से लेकर शून्यकाल तक एक के बाद एक मुद्दों पर विपक्ष ने सरकार को घेरा। जल जीवन मिशन में गड़बड़ी, सीएसआर फंड के उपयोग में अनियमितता, बांग्लादेशी घुसपैठ, अवैध रेत खनन और रेडी टू ईट योजना जैसे कई मुद्दों पर विपक्ष ने सत्ता पक्ष को कटघरे में खड़ा किया। जवाबों से असंतुष्ट विपक्ष ने दो बार सदन से वॉकआउट भी किया।
जल जीवन मिशन बना टकराव का केंद्र
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जल जीवन मिशन के तहत 2022–25 के दौरान खर्च और उपलब्धि पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केवल 31 लाख घरों तक ही पानी पहुंचा है जबकि लक्ष्य 49 लाख से अधिक था। उन्होंने आरोप लगाया कि “डबल इंजन सरकार” सिर्फ आंकड़े दिखा रही है, ज़मीन पर हकीकत कुछ और है।
डिप्टी सीएम अरुण साव ने जवाब में कहा कि 15,045 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं, 31 लाख से अधिक घरों को नल से जल दिया गया है। उन्होंने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर देर से काम शुरू करने का आरोप लगाया। लेकिन जब उन्होंने बताया कि पिछले आंकड़ों में 15 लाख घरों में केवल नल लगाया गया था, पानी नहीं दिया गया, तो विपक्षी सदस्य भड़क उठे।
सदन में नारेबाज़ी हुई और विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया।
सीएसआर फंड पर घमासान
भाजपा विधायक किरण देव सिंह ने बस्तर संभाग में सीएसआर मद की राशि के उपयोग पर सवाल उठाया। उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने बताया कि 2022 से 2025 के बीच ₹104.71 करोड़ की राशि प्राप्त हुई है, जिसमें जगदलपुर में ₹10.46 करोड़ से 89 कार्य स्वीकृत हुए, जिनमें से 65 पूरे हो चुके हैं।
लेकिन विपक्ष ने इसपर घोटाले और मनमानी आवंटन का आरोप लगाया। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सीएसआर मद के खर्च की जांच की मांग करते हुए कहा कि यह “पूरे प्रदेश में घालमेल का मामला है”।
रेत माफिया पर भी गरमाया सदन
शून्यकाल में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने प्रदेश में अवैध रेत खनन का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि “राजनांदगांव में गोली चली, रायगढ़ में अधिकारी जवाब देने से बचते हैं।” कांग्रेस विधायक उमेश पटेल और भूपेश बघेल ने इसे माफिया राज बताया।
हालांकि स्पीकर डॉ. रमन सिंह ने स्थगन प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया, जिससे नाराज़ विपक्ष ने फिर वॉकआउट किया।
बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर गरमाई बहस
ध्यानाकर्षण के दौरान भाजपा विधायक अजय चंद्राकर, धरमजीत सिंह और भावना बोहरा ने बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठ का मुद्दा उठाया। अजय चंद्राकर ने कहा कि “छत्तीसगढ़ में करीब 5 हजार अवैध घुसपैठिए मौजूद हैं, जो आधार, राशन कार्ड, पासपोर्ट बनवाकर सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं।”
गृह मंत्री विजय शर्मा ने जवाब में कहा कि रायपुर में 100 सीटर होल्डिंग सेंटर बनाया जा रहा है। चिन्हित घुसपैठियों को बीएसएफ के ज़रिए डिपोर्ट किया जाएगा। शिकायत के लिए टोल फ्री नंबर और टास्क फोर्स गठित की गई है।
रेडी टू ईट योजना में पक्षपात का आरोप
नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने रेडी टू ईट योजना में स्व-सहायता समूहों के चयन में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया।
सदन में मर्यादा पर भी सवाल
दिनभर की गरमागरमी के बीच अजय चंद्राकर और देवेंद्र यादव के बीच तीखी बहस हुई। स्थिति ‘तू-तू, मैं-मैं’ तक पहुंच गई, जिस पर स्पीकर डॉ. रमन सिंह ने हस्तक्षेप करते हुए सभी सदस्यों को “आसंदी की मर्यादा का पालन” करने की सख्त हिदायत दी।
विधानसभा अध्यक्ष की चेतावनी
स्पीकर डॉ. रमन सिंह ने कहा, “छत्तीसगढ़ की कार्यवाही पूरा देश देखता है, हम सबकी ज़िम्मेदारी है कि मर्यादा में रहकर चर्चा करें। आपसी बहस को व्यक्तिगत ना बनाएं, बल्कि नीति पर बात करें।”
विधानसभा का मानसून सत्र सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच मुद्दों की गूंज, आरोप-प्रत्यारोप, आंकड़ों की चुनौती और राजनीतिक रणनीति से पूरी तरह सराबोर रहा।
