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बलौदा बाजार में वाटर जग खरीदी पर मचा सियासी घमासान, विभाग ने बताया सच



51 लाख की खरीदी को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हुई रसीद, विभाग ने बताया निराधार

बलौदा बाजार, 15 जुलाई | आदिवासी विकास विभाग द्वारा वाटर जग की भारी मात्रा में खरीदी को लेकर बलौदा बाजार में नया विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक रसीद में दावा किया जा रहा है कि विभाग ने जेम पोर्टल के माध्यम से 51 लाख रुपये की लागत से वाटर जग खरीदे हैं। इस मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है और विपक्षी कांग्रेस ने इसे लेकर राज्य सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं।

कांग्रेस पार्टी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट “एक्स” (पूर्व ट्विटर) पर इस मामले को साझा करते हुए कहा कि आदिवासी बच्चों के नाम पर घोटाला किया जा रहा है। वायरल रसीद को आधार बनाकर पार्टी ने सरकार से जवाब माँगा है कि आखिर छात्रावासों के लिए इतनी बड़ी मात्रा में और इतनी ऊँची कीमत पर वाटर जग क्यों खरीदे गए।

विभाग ने किया आरोपों का खंडन

विवाद के बीच आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त सूरज कुमार मानिकपुरी ने सामने आकर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि वायरल हो रही सामग्री भ्रामक और तथ्यहीन है। उनके अनुसार, वर्तमान में विभाग द्वारा बलौदा बाजार जिले के किसी भी छात्रावास के लिए वाटर जग की कोई खरीदी नहीं की गई है और ना ही कोई भुगतान किया गया है।

उन्होंने बताया कि फरवरी 2025 में तत्कालीन सहायक आयुक्त संजय कुर्रे द्वारा जेम पोर्टल के माध्यम से 160 नग वाटर जग की खरीदी का एक प्रस्ताव जरूर तैयार किया गया था, लेकिन उस समय दरें अधिक होने के कारण यह प्रस्ताव वहीं निरस्त कर दिया गया था। उसके बाद से विभाग ने न तो कोई आदेश जारी किया, न ही खरीदी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।

भ्रामक प्रचार पर जताई चिंता

सहायक आयुक्त मानिकपुरी ने इस बात पर भी चिंता जताई कि सोशल मीडिया के माध्यम से विभाग की छवि खराब करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि विभाग द्वारा इस विषय में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता नहीं की गई है। “ऐसी भ्रामक जानकारियाँ न केवल अफवाह फैलाती हैं, बल्कि प्रशासनिक कार्यों में भी बाधा उत्पन्न करती हैं,” उन्होंने कहा।

राजनीति और प्रशासन आमने-सामने

इस मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। कांग्रेस जहां इसे सरकार की “घोटालेबाज़ी” करार दे रही है, वहीं सरकार के अधिकारी इस पूरे प्रकरण को बेबुनियाद बता रहे हैं। इससे यह स्पष्ट है कि आगामी दिनों में इस मुद्दे को लेकर और बयानबाज़ी देखने को मिल सकती है।

वाटर जग खरीदी का यह मामला अब सोशल मीडिया से उठकर सत्ता और विपक्ष के बीच तकरार का कारण बन गया है। सवाल उठता है कि क्या वास्तव में कोई खरीदी हुई थी या यह केवल एक निरस्त प्रस्ताव था? विभाग ने तो अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है, लेकिन अब इस पर अंतिम फैसला जनता की अदालत में ही होगा।


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