“राज्य सरकार इतनी बड़ी गड़बड़ी की जांच नहीं कर सकती, CBI को सौंपा जाए मामला”
— डॉ. चरणदास महंत, नेता प्रतिपक्ष
रायपुर, 16 जुलाई |
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन प्रधानमंत्री आवास ग्रामीण योजना में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों को लेकर सदन का माहौल गरमा गया। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने योजना में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए CBI जांच की मांग की, जिस पर सरकार की ओर से तीखा पलटवार किया गया।
डॉ. महंत ने कहा कि सुशासन तिहार के दौरान पीएम आवास योजना को लेकर हजारों शिकायतें सामने आई हैं, जिनमें कोटा, मनेंद्रगढ़ और तखतपुर जैसे क्षेत्रों में अधूरे मकानों को पूरा दर्शाकर भुगतान और लाभार्थियों से अवैध वसूली जैसे गंभीर मामले शामिल हैं।
उन्होंने कहा, “यह केवल एक योजना की गड़बड़ी नहीं, बल्कि जनता के साथ विश्वासघात है। राज्य सरकार या ईओडब्ल्यू इस स्तर की जांच कर ही नहीं सकती, इसीलिए यह मामला CBI को सौंपा जाए।”
मुख्यमंत्री का पलटवार: कांग्रेस के वक्त योजना रही ठप
विपक्ष के इन आरोपों पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में प्रधानमंत्री आवास योजना ठप पड़ी थी। उन्होंने कहा, “2023 के चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वादा किया था कि हमारी सरकार बनते ही पीएम आवास को प्राथमिकता दी जाएगी, और हमने ऐसा कर दिखाया। सरकार बनते ही पहली कैबिनेट बैठक में 18 लाख पीएम आवास स्वीकृत किए गए।”
सीएम ने बताया कि “डेढ़ साल में सभी स्वीकृति पूरी हो चुकी है, और कई आवासों में गृह प्रवेश भी कराया जा चुका है। कांग्रेस के पांच साल में जो नहीं हुआ, वो हमारी सरकार ने रिकॉर्ड समय में कर दिखाया है।”
डिप्टी सीएम का तीखा जवाब – “इतना पहले कभी नहीं हुआ”
डिप्टी मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी विपक्ष पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि योजना केंद्र सरकार की जरूर है, लेकिन उसे जमीन पर उतारने का काम राज्य सरकार कर रही है।
“हमने महज डेढ़ साल में 11 लाख 40 हजार आवास स्वीकृत कर दिए, जो पहले कभी नहीं हो पाया था। जहां गड़बड़ी की शिकायत है, वहां जांच की जाएगी, लेकिन विपक्ष बेबुनियाद आरोप लगाकर योजना को बदनाम कर रहा है।”
सदन में नोकझोंक, विपक्ष और सत्ता आमने-सामने
इस मुद्दे पर सदन में जोरदार बहस हुई। डिप्टी सीएम विजय शर्मा और नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत के बीच तीखी नोकझोंक हुई। कुछ समय के लिए सदन का वातावरण बेहद तनावपूर्ण हो गया। विपक्ष ने सरकार को घेरने की पूरी कोशिश की, तो सरकार ने आंकड़ों और योजनाओं की गति को अपना बचाव बनाया।
किसके पक्ष में जाएगा जनमत?
विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम आवास जैसे जनहितकारी योजना में भ्रष्टाचार के आरोप बेहद संवेदनशील हैं। जहां विपक्ष इसे ग्रामीण जनता के साथ धोखा बता रहा है, वहीं सत्तापक्ष इसे पिछली सरकार की विफलताओं पर पर्दा डालने की कोशिश मान रहा है।
CBI जांच की मांग से यह साफ है कि मामला अब सिर्फ सदन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय में इसका असर पंचायतों से लेकर विधानसभा तक दिख सकता है।
