रायपुर
छत्तीसगढ़ की राजनीति में मंत्रिमंडल विस्तार अब बीरबल की खिचड़ी बन चुका है। बीते बीस महीनों से सिर्फ़ खबरें पकाई जा रही हैं, परोसने के नाम पर प्लेट अब भी खाली है। नेता जी बार-बार सूट सिलवा रहे हैं, लेकिन शपथग्रहण की तारीख़ अब तक दर्ज नहीं हो पाई है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तंज कसते हुए कहा—
“मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा सुन-सुन कर अब तो कान पक गए हैं। भाजपा नेताओं ने इतने बार सूट सिलवा लिए कि अब तो अलमारी ही छोटी पड़ जाए।”
वहीं सत्ता पक्ष भी कहां चुप रहने वाला था। मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने पलटवार किया—
“ये तो वही बात हो गई जैसे बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना। ढाई-ढाई साल वाला फार्मूला कांग्रेस का था। उस समय टीएस सिंहदेव भी सूट सिलवाकर बैठे थे। भूपेश बघेल को तब ही चिंता करनी चाहिए थी।”
राजनीति के इस आगे-पीछे के खेल में जनता बस यही सवाल पूछ रही है कि आखिर कब खुलेगा “मंत्री मंडल का कमंडल”? या फिर ये खिचड़ी ऐसे ही धीमी आंच पर पकती रहेगी।
