रायपुर। प्रदेश की राजनीति इन दिनों एक अनोखे प्रेम-प्रसंग से गुदगुदाई हुई है। कहानी छोटी है लेकिन किरदार बड़े—मंत्री राजेश अग्रवाल और उनके प्रिय वाहन चालक तबरेज आलम। मंत्रालय में लोग मजे में कह रहे हैं—
“मंत्री जी मंत्रालय चलाएं या तबरेज, ये तो तय करना मुश्किल है!”
मामला तो सबको पता ही है कि मंत्री जी ने अपने आठवीं पास ड्राइवर तबरेज आलम को निज सहायक बनाने का पत्र भेजा था। GAD ने योग्यता का हवाला देकर फाइल लौटा दी। लेकिन मंत्री जी बोले—
“फाइल चाहे वापस हो जाए, मेरा तबरेज तो वहीं रहेगा जहाँ मैं रहूँगा!”
अब नया तमाशा यह कि नवा रायपुर स्थित मंत्री आवास में “निज सहायक – तबरेज आलम” का तगड़ा बोर्ड चमक रहा है।
बोर्ड देखकर लोग मजाक में कह रहे—
“योग्यता GAD देखे, बाकी योग ‘मंत्री’ देखेंगे!”
सूत्रों के मुताबिक, सरकार के मुखिया ने भी मंत्री जी को सीधी समझाइश दी थी—
“बाबा… निज सहायक कोई भी नहीं बन जाता!”
पर मंत्री जी शायद तबरेज संस्करण 2.0 डाउनलोड कर चुके थे, इसलिए सलाह का असर नहीं हुआ।

मंत्रालय के गलियारों में मजेदार चर्चाएँ चल रही हैं—
“तबरेज जी अगर और तरक्की करें तो अगली बार पीएस बन जाएंगे!”
“मंत्री के बंगले में अब फाइल से पहले तबरेज दिखाई देते हैं।”
“तबरेज के बोर्ड ने पूरे मंत्रालय की भी नेटवर्थ बढ़ा दी है!”
अब राजनीति के जानकार कहते हैं की—
“कई मंत्री अपनी टीम रखते हैं, पर यहां मामला टीम से आगे ‘तबरेज प्रीमियम प्लान’ वाला लग रहा है।”
उधर विपक्ष भी मजे ले रहा है—
“ये सरकार नहीं, तबरेज मंत्रालय है।”
तो भाजपा संगठन वाले चुपचाप मुस्कुरा रहे हैं कि
“चलो, हमसे ज्यादा मंत्री जी को तबरेज समझ में आता है।”
लेकिन असली सवाल वही—
क्या यह तबरेज प्रेम है?
क्या यह मंत्री की जिद है?
या यह सरकारी बंगले का नया HR मॉडल है—जहाँ योग्यता नहीं, मंत्री की पसंद चलेगी?
सच कुछ भी हो…
पर एक बात पक्की है—
छत्तीसगढ़ की राजनीति में इस समय सबसे चर्चित पद यदि कोई है, तो वह है:
‘मंत्री का निज सहायक – तबरेज आलम’
