कोरबा / पिथौरागढ़।
योग गुरु बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद को बड़ा झटका लगा है। उपभोक्ताओं के बीच सबसे अधिक पसंद किए जाने वाले उत्पादों में शामिल पतंजलि देसी घी सरकारी लैब की जांच में फेल पाया गया है। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने बाजार से घी के सैंपल लेकर जांच कराई थी। लैब रिपोर्ट आने पर पता चला कि उत्पाद निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरा है।
जिला मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए पतंजलि कंपनी के साथ-साथ उन दुकानदारों पर भी जुर्माना लगाया है जिन्होंने अमानक घी की बिक्री की थी।
लैब टेस्ट में क्या मिला
रिपोर्ट के अनुसार घी में स्वीकृत मानकों के अनुरूप फैट की संरचना नहीं पाई गई। उत्पाद की सुगंध, टेक्सचर और प्राकृतिक तत्व मानकों से कम निकले। दूध व दूध वसा से तैयार शुद्ध घी में पाए जाने वाले आवश्यक घटक अनुपस्थित थे। रिपोर्ट में मिश्रण और संदिग्ध एडिटिव्स के संकेत भी मिले हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह उत्पाद उपभोक्ता के स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण श्रेणी में आता है।
कोर्ट की कार्रवाई
सैंपल फेल होने के बाद जिला मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पतंजलि कंपनी पर आर्थिक जुर्माना लगाया है। इसके अलावा जिन दुकानदारों ने यह घी बेचा था, उन पर भी दंडात्मक कार्रवाई की गई है। दोषी बैच की बिक्री को प्रतिबंधित करने और बाजार में उपलब्ध इसी बैच के अन्य पैकेटों की जांच का निर्देश दिया गया है।
उपभोक्ताओं में बढ़ी नाराजगी
पतंजलि ब्रांड पर लोगों का भरोसा बेहद मजबूत रहा है। आयुर्वेद की बढ़ती लोकप्रियता और बाबा रामदेव की छवि के कारण उपभोक्ता इन उत्पादों को पूरी तरह शुद्ध मानकर खरीदते रहे हैं। लेकिन देसी घी का सैंपल फेल होने के बाद उपभोक्ताओं में निराशा और नाराजगी बढ़ी है। सोशल मीडिया पर भी लोग सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
नकली या घटिया घी खाने के नुकसान
डॉक्टरों का कहना है कि मानकहीन घी का ज्यादा समय तक सेवन शरीर के लिए कई तरह से नुकसानदेह हो सकता है। इससे कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। दिल से जुड़ी बीमारियां, ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ सकता है। पाचन तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है और इम्यूनिटी कमजोर हो सकती है। लंबे समय तक सेवन करने पर लिवर और किडनी पर भी बुरा प्रभाव पड़ सकता है।
प्रशासन की अपील
खाद्य सुरक्षा विभाग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि घी खरीदते समय पैकेट का बैच नंबर, एक्सपायरी डेट और निर्माता की जानकारी अवश्य जांचें। यदि गुणवत्ता को लेकर शंका हो तो तुरंत संबंधित खाद्य विभाग को शिकायत दर्ज कराएं। विभाग का कहना है कि उपभोक्ता स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाली किसी भी कंपनी या दुकानदार को बख्शा नहीं जाएगा।
अब आगे क्या
पतंजलि कंपनी से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया है। दोषी बैच की बिक्री पर सख्त निगरानी रखी जा रही है। आने वाले दिनों में बड़े पैमाने पर अन्य खाद्य उत्पादों की रैंडम जांच भी शुरू की जा सकती है। जैसे ही पतंजलि आयुर्वेद की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है, अपडेट जारी किया जाएगा।
