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मेडलाइफ अस्पताल में आयुष्मान के नाम पर खेल? शासन-प्रशासन कब जागेगा?


रायपुर — आयुष्मान भारत योजना, जो गरीब और जरूरतमंदों को मुफ्त इलाज का भरोसा देती है, उसी योजना को लेकर रायपुर के मेडलाइफ अस्पताल पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मरीजों से इलाज के नाम पर अवैध वसूली, बिल न देने और नियमों की खुलेआम अनदेखी के आरोप सामने आए हैं। सवाल यह है कि आखिर ऐसे निजी अस्पतालों पर शासन-प्रशासन की नजर कब पड़ेगी?


आयुष्मान योजना कैशलेस इलाज की गारंटी देती है, फिर मरीजों से हजारों और लाखों रुपये क्यों वसूले जा रहे हैं? यदि यह सच है, तो क्या यह योजना के साथ सीधा धोखा नहीं है? क्या गरीबों के हक पर डाका नहीं डाला जा रहा?


यह भी सवाल उठता है कि जब पहले भी कई निजी अस्पतालों पर कार्रवाई हो चुकी है, तो फिर ऐसे मामले दोबारा कैसे सामने आ रहे हैं? क्या जांच केवल कागजों तक सीमित है? क्या कुछ अस्पतालों को खुली छूट मिली हुई है?


मेडलाइफ अस्पताल प्रशासन की चुप्पी भी कई सवाल खड़े करती है। यदि आरोप निराधार हैं, तो अब तक स्पष्टीकरण क्यों नहीं आया? और यदि आरोप सही हैं, तो दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर यह सब कब तक चलता रहेगा? गरीब मरीज कब तक लुटते रहेंगे? शासन-प्रशासन कब तक आंख मूंदे रहेगा? क्या आयुष्मान योजना सिर्फ कागजों में ही रह जाएगी, या ज़मीनी हकीकत में भी उसका लाभ मिलेगा?


अब वक्त है कि प्रशासन जवाब दे। सिर्फ जांच नहीं, बल्कि ठोस और कठोर कार्रवाई हो, ताकि ऐसे अस्पतालों को स्पष्ट संदेश मिले कि गरीबों के इलाज के नाम पर लूट बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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