सचिव वर्ग ‘द’ से शुरू हुआ सफर रिटायरमेंट के बाद संविदा तक जारी, नियमों को ताक पर रख कर बने एमडी; भड़के अधिकारियों ने खोला मोर्चा, कार्यवाही की मांग
रायपुर / छत्तीसगढ़ की राजनीति और नौकरशाही में सरकारें आती-जाती रहती हैं, नीतियां बदलती हैं और मंत्री-अधिकारी अपनी-अपनी कुर्सियां खाली करते रहते हैं। मगर छत्तीसगढ़ राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड के मुख्यालय में एक ऐसा तिलिस्म स्थापित है, जिस पर समय और नियमों का कोई कानून असर नहीं करता। वर्ष 1985-86 में मध्य प्रदेश मंडी बोर्ड से सचिव वर्ग ‘द’ के रूप में करियर शुरू करने वाले महेंद्र सिंह सवन्नी की कुर्सी पर पकड़ इतनी मजबूत है कि जून 2024 में सेवानिवृत्त होने के बावजूद वे ‘संविदा प्रबंध संचालक (MD)’ का ताज पहनकर शान से विराजमान हैं।
विभागीय गलियारों में चुटकी ली जा रही है कि पिछले 16 वर्षों में प्रदेश के चार-चार कृषि मंत्री बदल गए, 10 से 12 प्रबंध संचालक आकर चले गए, लेकिन सवन्नी जी अपनी जगह से टस से मस नहीं हुए।
वरिष्ठता लांघने की जादुई कला
सचिवालय में दबी जुबान से चर्चा है कि नियमों की किताब में जो पन्ने साधारण कर्मचारियों के लिए दीवार बनते हैं, वे इनके लिए सीढ़ी बन जाते हैं। 2005 की वरिष्ठता सूची में क्रमांक 14 पर होने के बावजूद अपीलों और विशेष मेहरबानियों के जरिए शीर्ष पर पहुंचने का करिश्मा रहा हो, या 2011 में मुख्यालय में पदस्थापना के बाद संयुक्त संचालक से अपर संचालक और फिर अतिरिक्त प्रबंध संचालक तक की छलांग—हर पदोन्नति के साथ विवादों का साया रहा।
नियम कहते हैं कि मंडी बोर्ड के प्रबंध संचालक का पद भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय वन सेवा (IFS), भारतीय राजस्व सेवा (IRS) या कृषि विभाग के अपर संचालक स्तर के वरिष्ठ संवर्ग के लिए आरक्षित होता है। लेकिन राजनीति के गलियारों में मजबूत रसूख का कमाल देखिए कि इस गैर-राजपत्रित कैडर बैकग्राउंड के अधिकारी को संविदा पर एमडी की कमान सौंप दी गई।
तानाशाही कार्यशैली से त्रस्त कर्मचारियों ने फूंका बगावत का बिगुल
लंबे समय से कुर्सी पर काबिज साहब के कथित ताना-बाने और मनमाने रवैये से अब विभागीय अधिकारी-कर्मचारी त्रस्त हो चुके हैं। संयुक्त संचालक, अपर संचालक और मंडी सचिवों ने सामूहिक हस्ताक्षर कर कृषि मंत्री को खुला ज्ञापन सौंप दिया है। आरोप है कि बोर्ड में कोई आवाज न उठा सके, इसके लिए मातहतों से अभद्र व्यवहार, गाली-गलौज और दूर-दराज तबादले की धमकियां देना आम बात हो चुकी है।
अधिकारियों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि समय रहते संविदा प्रबंध संचालक की नियुक्ति निरस्त कर किसी योग्य अधिकारी की पदस्थापना नहीं की गई और पुरानी विवादित पदोन्नतियों की उच्चस्तरीय जांच नहीं कराई गई, तो मंडी बोर्ड में बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा। अब देखना यह है कि प्रशासन नियमों की बहाली करता है या फिर ‘साहब’ का राजनीतिक प्रभाव एक बार फिर नियमों के ऊपर भारी पड़ता है।
