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कांग्रेस वोट चोरी का झूठा नैरेटिव गढ़ रही है : संतोष पाण्डेय

भाजपा सांसद ने निर्वाचन आयोग का बचाव किया, एसआईआर प्रक्रिया को बताया पारदर्शी

रायपुर। भाजपा के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता एवं सांसद संतोष पाण्डेय ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर वोट चोरी के आरोपों के जरिए जनता को भ्रमित करने का आरोप लगाया है। शनिवार को कुशाभाऊ ठाकरे परिसर स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि कांग्रेस जनता का समर्थन खोने के बाद निर्वाचन आयोग और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाकर झूठा नैरेटिव गढ़ने की कोशिश कर रही है।

संतोष पाण्डेय ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हो रहे विकास कार्यों से ध्यान भटकाने के लिए विपक्ष चुनाव प्रणाली की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है। उन्होंने कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास का उल्लेख करते हुए 1952 के चुनाव में डॉ. भीमराव आंबेडकर की हार, 1975 में इंदिरा गांधी के चुनाव से जुड़े न्यायिक फैसले और 1987 के जम्मू-कश्मीर चुनाव का जिक्र किया। उन्होंने कांग्रेस पर अपने राजनीतिक हितों के लिए लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का भी आरोप लगाया।

वोट शेयर में गिरावट का किया उल्लेख

भाजपा सांसद ने कहा कि 1952 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का वोट शेयर लगभग 45 प्रतिशत था, जो 2024 के लोकसभा चुनाव में घटकर करीब 21.4 प्रतिशत रह गया। उनके अनुसार, जनसमर्थन में कमी के कारण कांग्रेस अब ईवीएम और वोट चोरी जैसे मुद्दों को उठाकर अपनी राजनीतिक विफलताओं से ध्यान हटाना चाहती है। उन्होंने राहुल गांधी द्वारा विदेश में निर्वाचन आयोग को लेकर दिए गए बयानों की भी आलोचना की।

एसआईआर प्रक्रिया का किया समर्थन

पाण्डेय ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का समर्थन करते हुए कहा कि मतदाता सूची को शुद्ध और पारदर्शी बनाना निष्पक्ष चुनाव के लिए जरूरी है। उन्होंने केरल के कांग्रेस नेताओं रमेश चेन्निथला, मैथ्यू कुझलनादन और शशि थरूर के बयानों का हवाला देते हुए दावा किया कि वहां भी इस प्रक्रिया के लाभ सामने आए हैं।

उन्होंने कहा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया आजादी के बाद से अलग-अलग समय पर होती रही है। एसआईआर के तहत बूथ लेवल अधिकारी घर-घर जाकर जानकारी जुटाते हैं। अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और दोहरी प्रविष्टि वाले मतदाताओं की पहचान की जाती है। इसके बाद प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित कर दावे और आपत्तियां आमंत्रित की जाती हैं तथा निर्धारित प्रक्रिया के बाद अंतिम सूची जारी होती है।

निर्वाचन आयोग को बताया लोकतंत्र की रीढ़

भाजपा सांसद ने संविधान के अनुच्छेद 324 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 का उल्लेख करते हुए निर्वाचन आयोग की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष चुनाव के लिए विश्वसनीय मतदाता सूची जरूरी है और आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाने से पहले तथ्यों को सामने रखना चाहिए।

पाण्डेय ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि लोकतंत्र में चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं पर जनता का भरोसा बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है।

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