00 चिरमिरी निगम के तात्कालिक प्रभारी आयुक्त मनोज सिंह के विरूद्ध कोर्ट में परिवाद पेश
कोरिया / चिरमिरी – जिले के नगरीय क्षेत्र चिरमिरी नगर पालिक निगम में फर्जी साल्वेंसी से ठेका प्राप्त करने मामले मे तात्कालिक प्रभारी आयुक्त मनोज सिंह के शामिल होने की जानकारी पर आरटीआई कार्यकत्र्ता राजकुमार मिश्रा ने कोरिया जिले के मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी के न्यायालय में परिवाद पेश किया है।
इस संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार चिरमिरी निवासी आरटीआई कार्यकत्र्ता राजकुमार मिश्रा ने स्थानीय पोंडी थाना में आवेदन देकर चिरमिरी निगम के तात्कालिक प्रभारी आयुक्त मनोज सिंह के विरूद्ध ठेकेदार के द्वारा फर्जी साल्वेंसी जमाकर ठेका प्राप्त करने में शामिल होने के संबंध के कारण एफआईआर दर्ज करने का अनुरोध किया गया था। पोंडी पुलिस द्वारा करीब ढेड़ माह जांच करने के बाद ठेकेदार के विरूद्ध एफआईआर दर्ज कर दिया गया। आरटीआई कार्यकत्र्ता राजकुमार मिश्रा के कई प्रयास के बाद भी जब आयुक्त मनोज सिंह के विरूद्ध थाना एफआईआर नही लिखा गया तब आरटीआई कार्यकत्र्ता ने न्यायालय का शरण लिया। आरटीआई कार्यकत्र्ता राजकुमार मिश्रा ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेड बैकुंठपुर जिला कोरिया छ0ग0 के न्यायालय मे दस्तावेज सूची के एक आवेदन धारा 190(1) सह पठित धारा 210 दंड प्रक्रिया संहिता के पेश किया गया। इस आवेदन पर न्यायालय ने आदेश किया कि संबंधित थाना से इस संबंध में प्रतिवेदन मंगवाया जाय। न्यायालय के इस आदेश पर पोंडी पुलिस द्वारा जांच प्रतिवेदन पेश किया गया। पुलिस ने अपने प्रतिवेदन में लिखा कि परिवादी राजकुमार मिश्रा के द्वारा थाना पोंडी में एक शिकायत किया गया था जिस पर दिनांक 29.10.15 को पोंडी थाना में अपराध क्र.146/2015 धारा 420,465,467,468,471 भा.दं.वि. कायम कर विवेचना किया जा रहा है। परिवादी द्वारा आवेदन पत्र में आयुक्त मनोज सिंह के द्वारा ऐसे अपराध को छिपाया गया है जिसकी सूचना देने के लिए वे आबद्ध थे। इस संबंध मे परिवादी द्वारा बताये गये गवाहों का ब्यान लिया गया उन दोनों गवाहों ने अपने कथन में बताया कि आयुक्त द्वारा किसी भी प्रकार का अपराध नही छुपाया गया है निगम के अधिवक्ता से परामर्श के अनुसार ठेकेदार को ब्लैक लिस्टेड किया गया है और संबंधित ठेकेदार से 945127 रू. रोक लिया गया है इस तरह कोई भी वित्तिय क्षति नही हुआ है। जांच में परिवादी का भी कथन लिया गया और निगम के वर्तमान आयुक्त का भी कथन लिया गया उन्होनें भी बताया कि शासन को कोई वित्तिय क्षति नही हुआ है। अब तक के जांच में अनावेदक मनोज सिंह के विरूद्ध कोई सबुत नही आये है अपराध की विवेचना किया जा रहा है विवेचना में यदि आरोपी के विरूद्ध कोई तथ्य आते है तो विधि सम्मत कार्यवाही किया जायेगा। न्यायालय ने पुलिस के इस प्रतिवेदन को खारिज कर आरटीआई कार्यकत्र्ता राजकुमार मिश्रा को इस संबंध में साक्ष्य प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।





