कोरिया / विशुद्ध ग्रामीण परिवेश में पले बढ़े स्व सुरेंद्र बहादुर तिवारी के अकस्मात निधन से सम्पूर्ण क्षेत्रवासी हतप्रभ और दुखी हैं।
जिला पंचायत सदस्य देवेंद्र तिवारी के जेष्ठ भ्राता स्व सुरेंद्र बहादुर तिवारी का जन्म बेहद साधारण से परिवार में 25 सितम्बर 1971 को हुआ। बचपन से ही अत्यंत मेधावी सुरेंद्र की प्रारंभिक शिक्षा सोनहत तहसील के ग्राम घुघरा में सम्पन्न हुई। झगराखण्ड में गणित – विज्ञान से इंटरमिडीएड करने के बाद सुरेंद्र बहादुर ने साइंस कालेज रीवा से विज्ञान में स्नातक की उपाधि प्राप्त की थी। यद्यपि प्रतिभा सम्पन्न सुरेन्द्र बहादुर का चयन स्नातक अध्यन हेतु राजकुमार कालेज रायपुर के लिए भी हो गया था किन्तु पारिवारिक कारणों से इन्होंने रीवा में पढ़ना ही उचित समझा। स्नातक शिक्षा के बाद पहले ही प्रयास में सुरेन्द बहादुर का चयन भारतीय जीवन बीमा में हुवा और पहली पदस्थापना अम्बिकापुर शाखा में हुई। अम्बिकापुर के बाद बैढन, शहडोल और कांकेर तथा मनेन्द्रगढ़ में सेवा के बाद अंतिम समय मे कोतमा में शाखा प्रबंधक के रूप में पदस्थ थे। 1993 में जीवन बीमा से अपनी सेवा की शुरुवात करने वाले सुरेंद्र बहादर हँसमुख, मिलनसार व विनोदी प्रवृत्ति के थे। सेवाकाल के दौरान ही सुरेंद्र बहादुर ने विधि में स्नातक भी किया साथ ही राजनीति, समाजशास्त्र एवं अंग्रेजी में स्नातकोत्तर की उपाधि भी प्राप्त की। कम समय मे पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करने वाले सुरेंद्र कवि ह्रदय भी थे। दो जुड़वा बच्चे विधि और विधान के पिता सुरेंद्र बहादर का 6 अक्टूबर को 47 वर्ष की आयु में ह्र्दयगति रुक जाने के कारण असमय निधन हो गया।
निधन के खबर से सम्पूर्ण क्षेत्र में शोक व्याप्त है। मित्रों और शुभचिन्तको ने परिवार पर आए संकट को सहने एवं दुख की इस घड़ी में परिवार जनों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट की हैं।
