रायपुर।
15 अगस्त से महतारी वंदन योजना का दूसरा चरण शुरू होने जा रहा है, लेकिन इस बार ‘शुभारंभ’ सिर्फ बस्तर संभाग से होगा। सरकार का कहना है— नक्सल प्रभावित और दूरस्थ इलाकों में छूट चुकी महिलाओं को पहले लाभ दिलाया जाएगा। मतलब, पहले जंगल-पहाड़ की बहनें, फिर शहर-बाज़ार की।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने साफ़ कहा— “बस्तर में कोई भी हितग्राही छूटना नहीं चाहिए, आगे चलकर पूरी प्रदेश की माताओं-बहनों को जोड़ा जाएगा।”
लेकिन कांग्रेस ने इस ‘एक्सक्लूसिव लॉन्च’ पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर बोले— “बस्तर की महिलाओं को लाभ देना अच्छी बात है, लेकिन रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और सरगुजा की बहनों को क्यों लाइन में खड़ा किया जा रहा है? ऊपर से आवेदन सिर्फ ऑफलाइन… ये क्या बात हुई!”
सियासी पिच गर्म हुई तो अरुण साव ने भी बाउंसर फेंक दिया— “कांग्रेस ने पांच साल में बहनों के लिए पांच पैसा नहीं दिया, अब खातों में पैसा जाने लगा तो पेट में दर्द हो रहा है।”
बहरहाल, बस्तर में फॉर्म भरने की हलचल शुरू हो चुकी है। अब बाकी संभाग की महिलाएं यही सोच रही हैं— योजना का फायदा कब मिलेगा, और मिलेगा तो क्या तब भी फॉर्म ऑफलाइन ही भरने होंगे?
