रायपुर, 12 जून। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने प्रदेशभर में विशेष अभियान चलाकर 20 बच्चों को संरक्षण में लिया। इनमें रायपुर के उरला औद्योगिक क्षेत्र स्थित मारुति नंदन स्ट्रक्चर इंडस्ट्रीज से 9 नाबालिग बच्चों का रेस्क्यू किया गया, जबकि बिलासपुर में आरपीएफ की मदद से 7 और रायपुर जीआरपी के माध्यम से 4 बच्चों को सुरक्षित निकाला गया।
आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के नेतृत्व में उरला स्थित फैक्ट्री में हुई औचक कार्रवाई के दौरान नाबालिगों से जोखिमपूर्ण कार्य कराए जाने का मामला सामने आया। सभी 9 बच्चों को तत्काल संरक्षण में लेकर बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि रेस्क्यू किए गए बच्चे ओडिशा, उत्तर प्रदेश के बरेली और पश्चिम बंगाल के आसनसोल के रहने वाले हैं। बच्चों के अनुसार, उन्हें एक ठेकेदार के माध्यम से रायपुर लाया गया था, जो बिहार का निवासी है। मामले में बाल तस्करी समेत अन्य पहलुओं की भी गंभीरता से जांच की जा रही है तथा परिजनों से संपर्क की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
आयोग के अनुसार, प्रथम दृष्टया बच्चों के साथ शोषण और अवैध रूप से जोखिमपूर्ण कार्य कराए जाने के तथ्य सामने आए हैं। इस आधार पर किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की विभिन्न धाराओं के तहत वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि बाल श्रम बच्चों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है और आयोग बाल श्रम व बाल तस्करी जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहा है। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के साथ बच्चों के संरक्षण और पुनर्वास की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।
